इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंगोबर मलते रहें। जब तक कौट निकलने बन्द न हो जायें।
४५-स्वादिष्टि, पाचक, रेचक और दीपक चूर्ण- ३ ग्राम हींग भुनी, ४० ग्राम जौरा भुना, ४० ग्राम अनारदाना, १० ग्राम काली मिर्च, १० ग्राम सनाय, २० ग्राम नौसादर हाँडी का, १० ग्राम काला नमक, १० ग्राम छोटी हर, १० ग्राम साँठ, १० ग्राम पीपल छोटी, १० ग्राम चव, १० ग्राम चौते की छाल, १० ग्राम साँफ, १० ग्राम सैन कचरी, १० ग्राम तेजपात। कूट कर चूर्ण बना लें। सेवन करें।
४६-वात नाशक- साँठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, चव, चौते की छाल, सैनकचरी सब को समान भाग लेकर कूट लें। दाल, शाक, सब्जी आदि में डालकर सेवन करें वात नाशक है।
४७-ठण्ड के लिये- ५ ग्राम जायफल, १० ग्राम जावित्री, २५ ग्राम दारचीनी, २० ग्राम लौंग, २५ ग्राम हरी इलायची, सबको कूट लें २ से ४ रस्ती तक दाल, शाक, सब्जी में डालकर सेवन करें ठण्ड के विकार को दूर करेगा। उत्तम है।
४८-अग्नि मुख रस- शुद्ध वत्सनाभ (सिंगया) १ ग्राम, शुद्ध सिंगरफ २ ग्राम, केशर ४ ग्राम, लौंग ८ ग्राम। सबको बारीक करके देसी पान के रस की सात भावना देकर मूंग के दाने की बराबर गोलियाँ बना लें। एक या दो गोली दूध से, वात कफ नाशक और वीर्य वर्धक है।
४९-आधा शीश दर्द पर- एक रीठे को मुख पर से काट कर गोली निकाल दें। रात्रि को खाली रीठे में पानी भरकर रख दें, प्रातः काल रीठे को पानी की दो, चार बूँदें नाक के उस नथने में डालें जिधर सर में दर्द है। यदि दर्द शेष रहे तो अगले दिन फिर नया रीठा लेकर प्रयोग करें तीन चार दिन में पूर्ण आराम हो जायगा।
५०-बबासीर के मस्तों पर- शौच के लिए ले जाने वाले पानी में डिटोल की दो बूँदें डालकर मल विसर्जन के पश्चात् गुदा
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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