इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 224, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंको इसी पानी से साफ करें, इस प्रकार ३ या ४ मास में अर्श के मत्से अपने आप सूख कर नष्ट हो जाते हैं। गुदा पर खुरकी मालूम हो तो जूरा-सा देसी घी लगा दें।
५१-नेत्र रोगों पर- २५० ग्राम शुद्ध गुलाब जल, १० ग्राम गुलाबी फिटकरी, २ ग्राम हरी इलायची के दाने कूटकर, २०० मिलीग्राम तूतिया, सबको मिलाकर पक्की शीशे में बन्द करके २० दिन रखा रहने दें। दिन में दोबार हिला दिया करें २० दिन पश्चात् छान कर रख लें नित्य नेत्रों में एक-एक बूँद डालें। नेत्रों के सभी रोगों को दूर करके रोशनी बढ़ाता है, मोतियाबिन्द पर भी लाभ करता है।
५२-नेत्र मणि- मकोय सूखी २५० ग्राम, दारु हल्दी २५० ग्राम, गुलाब के फूल की सूखी पत्तियाँ ५० ग्राम, भीम सैनी कपूर ५ ग्राम, मिश्री ५० ग्राम, शहद २५ ग्राम, पानी ४ लीटर।
विधि- दारुहल्दी की लकड़ी को बारीक कूट लें, मकोय, गुलाब के फूल की पत्तियाँ इनको पानी से धोकर साफ करलें बाद में पीतल के पात्र में ४ लीटर पानी डाल कर उसमें भिगो दें १२ घन्टे के पश्चात् मंद-मंद आग पर पकायें, जब पानी एक लीटर शेष रह जाय तो उतारकर ठण्डा करके छान लें। तौबे के पात्र में उक्त पके पानी को डालकर उसमें मिश्री डाल दें और फिर आग पर पकने रख दें जब शहद की तरह गाढ़ा हो जाय तो उतार कर रखें, शहद में भीम सैनी कपूर डालकर खरल में खूब घोटें जब कपूर का दाना न रहे तो पके हुए पदार्थ को डालकर फिर घोटें तैयार होने पर शीशे में भरकर रख लें।
प्रयोग- इसे नित्य रात्रि में संलाई के साथ आँखों में लगाने से आँखों के सभी रोग दूर होते हैं, रोशनी बढ़ती है।
५३-दीर्ता के लिये- ३० ग्राम पोस्त डोडा, १० ग्राम छाल कीकड़, ५ ग्राम नमक, ५ ग्राम फिटकरी, १ सेर पानी में
इच्छानुसार सन्तान
२१८
वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri