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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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सबको बारीक कूटकर शहद मिलाकर २, २ रस्ती की गोलियाँ बना लें। १, २ गोली मुख में डालकर चूँसे दिन में ४ बार। खाँसी, कण्ठ बैठ जाना आदि पर उत्तम है। इसे एहलादि वटी कहते हैं।

६१-जिगर के प्रत्येक उपद्रव पर अति उत्तम प्रयोग- देसी पीली हर गुठली रहित, काली हर गुठली रहित, काली हर, नरकचूर, बायबिङग, सौठ, काली मिर्च, चौकिया सुहागे की खील, नौसादर देसी हाँडों का, काला नमक, सागर (साम्पर) नमक, सँदा (लाहौरी) नमक। सब को समान भाग लेकर बारीक कूटकर रख लें, आयु के अनुसार, कम अधिक मात्रा बनाकर भोजन के पश्चात् दोनों समय सेवन करें।

६२-खुनाक टौंसिल पर- गाजवीं २।। ग्राम को १०० ग्राम पानी में शीशे के पात्र में रात को भिगो दें प्रातः एक उबाल देकर छानकर पान करें। इससे जुकाम भी ठीक हो जाता है।

६३-जल जाने पर उपचार- तत्काल धीगवार का गुदा मलने से छाले नहीं पड़ते। गाय का ताजा गोबर भी मलने से लाभ होता है। कबीला, कपूर- देसी, जस्त फूला, मुर्दासींग सबको बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसकर कपड़छन करलें, चमेली या तिल के तेल में मिलाकर लगाने से तत्काल ठण्डक पड़ती है और विषांश निकलने लगता है यदि खुरन्ट को न छुटाया गया तो जले के चिन्ह भी नहीं रहते और खुरन्ट अपने आप उतर जायगा।

६४-सफेद दाग- १ किलो बापची, २०० ग्राम मेथी, १०० ग्राम हल्दी। सबको बारीक कूट कर चूर्ण बना लें। बापची में तेल होता है इस कारण आग पर गर्म करके भी कूट सकते हैं। जब चूर्ण तैयार हो जाये तो इसमें से ५ ग्राम लेकर, २०० ग्राम पानी में रात को भिगो दें प्रातः काल छान कर पी लें, इसी प्रकार प्रातः काल को भिगो कर रात्रि को पी लें। एक

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्त

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri