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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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उपयोगी है। शहद में बलानुसार प्रयोग करें। या रात के भीगे बादाम की मींग ५ ग्राम को बारी पीसकर उसमें ५ ग्राम मक्खन और १० ग्राम शहद मिलाकर औषधि का सेवन करने से अधिक लाभ होता है।

१००-ज्योतिषपति तेल- इसे मालकांगनी का तेल भी कहते हैं। इसका तेल नित्य १-२ बूँद खाण्ड के बताशे में अथवा खाली कपूल में डालकर सेवन करें, २ बताशे और खा लें। इनके सेवन से स्मृति बढ़ती है, बुद्धि स्थिर होती है। एक बूँद तेल दोनों हाथ की हथेलियों पर लगाकर अंगूठे से २ मिनट तक मलते रहने से आँखों की ज्योति बढ़ती है। इसका सेवन गर्म प्रकृति के और बच्चों को नहीं कराना चाहिये। यह हलका रेचक होता है। जिन बच्चों की नेत्र ज्योति कम है उनकी हथेलियों पर मल सकते हैं, नेत्र ठीक बने रहते हैं।

१०१-कैन्सर के लिये उत्तम प्रयोग- हीरा भस्म इसे वज्रभस्म भी कहते हैं। ११ रत्नी, सुवर्ण भस्म, मुक्तापिष्टी और अघ्रक भस्म सी पुटी २-२ माशा सबको मिलाकर ४८ पुड़ियाँ बनालें। प्रतिदिन प्रातः १ पुड़िया मलाई मिश्री के साथ देने से कर्कस्फोट अर्थात् कैन्सर आदि की प्रस्थियाँ गलकर नष्ट हो जाती हैं। देह के भीतर होने वाले पुष्पशत, अबुर्द, कर्कस्फोट कैन्सर पिलपिला, ग्रन्थीदार, चारों ओर फैलने वाला, रक्त कैन्सर, गुल्म आदि सब पर सफलता सहित कार्य करता है। हीरा भस्म के अभाव में वैक्रान्त भस्म ली जा सकती है।

१०२-कांचनार गुग्गुल- के प्रयोग से कण्ठमाला, अपची, अबुर्द, कर्कस्फोट (कैन्सर) ग्रन्थी व्रण, गुल्म, कुष्ठ, भगन्दर आदि उग्र रोगों में अतिलाभदायक है। इसका सेवन ३-४ मास तक निरन्तर करना चाहिये। २ गोली खदिररिष्ट या त्रिफला क्वाथ से लें।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri

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