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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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१०३-माजूम उशबा- इसके सेवन से जीर्णलीन, विषको जलाने और स्वेद अर्थात् पसीने द्वारा विष को बाहर निकालने के लिये प्रयोजित होता है। जीर्ण फिर्ग, जीर्ण सुजाक, नाड़ी ब्रण, विस्फोटक आदि लीन विष से उत्पन्न रक्त विकार चर्मरोग कण्डु, अर्श, संधि स्थानों की वेदना आदि को दूर करता है। अबुर्द, कैन्सर और ट्यूमर अन्तर्विद्रधि अर्थात् आंत का बढ़ना आदि लीनविष को गलाने में उपयोगी है। सेवन दिन में एक बार प्रातः या रात्रि को सेवन करें। अनुकूल रहे तो गोदुध का सेवन करें।

१०४-सूर्य गुणी औषधि- इन्दिरा गुप्ता, वेद कृति १३, राम बिहार कालोनी, जिला सहकारी बैंक के पीछे मुरादाबाद से प्राप्त हो सकती है। इसका सेवन गर्भावस्था के ८१ से ८५ दिन के मध्य में सेवन कराने से पुत्र की प्राप्ति होती है।

१०५-संख्या चूर्ण नं०१- शुद्ध सफेद संख्या १ग्राम, वंशलोचन असली १०ग्राम, दानेदार चीनी १०ग्राम इन तीनों में से पहले खरल में डाल कर संख्या को घोटें, पश्चात् वंशलोचन डालकर घोटें, उसके पश्चात् चीनी डालकर खूब घोटें कम से कम ६ घन्टे की घुटाई होनी चाहिये। संख्या चूर्ण नम्बर १ तैयार है। मात्रा १२ती मक्खान या मलाई में मिलाकर चाटें। भोजन के एक घन्टे पश्चात्।

इसके सेवन से प्रत्येक रोग की उग्रता के कारण बनी निर्बलता को शीघ्र दूर करता है। इसके साथ घी देसी और दूध का अधिक सेवन करें। यह श्वास तथा कास खाँसी आदि में अतिहितकर है। हस्त मैथुन के रोगियों को तत्काल लाभ करती है। रक्तवर्धक है। ठण्ड को दूर करती है।

१०६-संख्या चूर्ण नं२- संख्याचूर्ण नं१ १०ग्राम, वंशलोचन २० ग्राम, चीनी (खाण्ड) २०ग्राम। इन तीनों को खूब बारीक खरल कर के रख लें।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri