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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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कुछ पत्र

डा० देव शर्मा वेदालंकार रोहिणी देहली से ८/११/२००३ को लिखते हैं- 'इच्छानुसार सन्तान' मेरी सम्मति में सर्वश्रेष्ठ कृति है। आपने क्यों? कैसे? इस विषय को छुआ। यह तो मिलकर ही जान पायेंगे, परन्तु विद्वानों व आचार्यों की दृष्टि १२८ वर्षों में इधर नहीं पड़ी और न महर्षि दयानन्द के पश्चात् इसकी आवश्यकता ही महसूस की गयी। जिसका दुष्परिणाम हृदय को उद्वेलित कर देता है।


जयपुर से पत्र- मेरे पति आफिसर ग्रेड की सर्वित में हैं, दो मास की ट्रेनिंग के लिये यहाँ पर आये हैं। एक अन्य अधिकारी के यहाँ रात्रि का भोज था। हम सब जाने गये। मेरे पास दो पुत्रियाँ हैं। उनको देखकर उनकी पत्नी ने मेरी पत्नी से कहा- क्या आपके पुत्र नहीं है? मैंने कहा 'हाँ'। उन्होंने अपने पुस्तकालय में से आपकी पुस्तक 'इच्छानुसार-सन्तान' निकाल कर मुझे दी। मैंने घर आकर उसे रात्रि को ही पूरा पढ़ लिया और मन में विचार आया जो इस समय गर्भ है उसकी सफाई कराकर इस विधि से गर्भ धारण करूँ। आगे एक स्थान पर मैंने पुत्र की कामना हेतु 'सूर्यगुण' औषधि के सेवन का सुझाव दिया है, उसे देखकर औषधि। मंगवाने को पत्र लिखा औषधि गई और जन्मू कश्मीर से पुत्र के जन्म की सूचना मिली।


मोरिशस के ट्रायोलेट निवासी श्री विष्णुदत्त देमकाह ना लिखते हैं सोभाग्यवश पुराने आर्य मित्र में पढ़ा 'इच्छानुसार सन्तान' कैसे हो सकती है। २३/३/२००५ को पत्र द्वारा 'इच्छानुसार सन्तान' पुस्तक मंगवाई। १८/४/२००५ को दूसरे पत्र में लिखा वर्षों की

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri