इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 69, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंअर्थ- पूर्व दिशा की ओर सिर करके सोने से धन की प्राप्ति होती है, दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोने से आयु बढ़ती है, पश्चिम दिशा की ओर सिर करके सोने से चिन्ता रहती है और उत्तर दिशा को सिर करके सोने से मृत्यु होती है। पश्चिमी विद्वान् भी मानने लगे हैं कि उत्तर को सिर करके सोने से नेत्रों की ज्योति नष्ट हो जाती है, वह कहते हैं कि हमारे शरीर में एक रेखा खड़ी रहती है, परन्तु उत्तर की ओर सिर करके सोने से ध्रुव की शक्ति से यह रेखा बेड़ी होकर लहराने लगती है, इससे मस्तिष्क रोग, नेत्र रोग हो जाते हैं। सदा उत्तर को सिर करके सोने वाला या तो पागल हो जायगा या अन्धा हो जायगा। जब रोगी मरणोपसन्न हो और दम घुट रहा हो तो उसका सिर उत्तर दिशा की ओर करने की प्रथा हमारे भारत वर्ष में प्रचलित है, इससे प्राण सुगमता से निकल जाता है, इससे सिद्ध होता है कि उत्तर दिशा में प्राणकर्षक कोई वस्तु अवश्य है।
पूर्वरात्रे व्यतीतेतु सङ्ख्येद्वैतमिदिरम्।
पादौपक्षालयेत्पूर्वं पश्चाच्छव्यां समाविशेत्॥
यमः
अर्थ- यमाचार्य का मत है कि एक प्रहर रात्रि व्यतीत हो जाने पर सोने के लिए अन्तःपुर में प्रवेश करे और चारपाई पर बैठकर पीवों को भली प्रकार धोकर तौलिया से साफ करके ईश्वर का स्मरण करते हुए सो जावे। ऐसा करने से निद्रा खूब आती है और स्वप्नदोषादि नहीं होते।
चारपाई पर पहले बार्यी करवट लेटक ८ शर्वास लो फिर दार्यी करवट से १६ और फिर सीधे चित होक ३२ शर्वास लेकर चाहें जिस करवट सो जाओ। पीठ के बल चित और बाई करवट सोने से पाचन शक्ति ठीक रहती है और आयु बढ़ती है।
वाम दिशायामनलो नामेरुव्यव्ति जन्तूनाम्।
तव्यात्तु वाम पार्श्वं शयति भुक् प्रपाकर्थम्।।
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri