इच्छानुसार संतान
Ichhanusar Santan
बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा
स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)
पृष्ठ 80, कुल 250 में से
संदर्भ में पढ़ेंकन्यों पर भारत का भविष्य है। युवाकाल में खोटी संगत में न पड़कर इन कुट्टेओं से बचकर अपने शरीर को पुष्ट बनाकर विद्या प्राप्त करो। जिससे भारत का भविष्य उज्ज्वल होकर समस्त विश्व को सभ्यता और साम्यता का पाठ दे सके।
हमारा इतिहास बताता है कि द्वारपर में वीर अर्जुन ने अमरीका के राजा की कन्या उलूपी से विवाह किया था। धर्मराज युधिष्ठिर की राजसूय यज्ञ में समस्त विश्व के राजाओं ने अपना-अपना कर देकर महाराजा युधिष्ठिर को चक्रवर्ती राजा माना था। हे भारतवासियों! हांशा मत हो ब्रह्मचर्य का पालन करो और फिर से अपने पूर्वजों के समान चक्रवर्ती राजा बनो।
ब्रह्मचर्य साधन
प्रातः सूर्योदय से कुछ समय पूर्व शौच, संध्यापासनादि से निवृत्त होकर सिद्धासन पर बैठे। आसन लगाते समय ध्यान रहे कि पहले बायें पैर को एड़ी गुदा और अण्डकोषों के मध्य सीमन पर लगायें, पश्चात् दाहिने पैर की एड़ी लिंग के मूल पर रखनी चाहिए, दोनों पैरों के गट्टे आपस में ऊपर नीचे मिले रहें। कुछ ही दिनों में आसन पर बैठने का सही अभ्यास हो जायगा। आसन पर सीधे बैठकर देखें कौन-सा स्वर चल रहा है, जिस नथने से श्वास आ जा रही हो उससे दूसरे नथने को अंगुली या अंगुठे से दबाकर बन्द करें, फिर चलते हुए नथने से धीरे-धीरे श्वास अन्दर खींचें, उसी समय गुदा को ऊपर खींचकर संकोचन करते हुए मूल बन्ध लगायें। पूर्ण श्वास भर जाने पर नथने से हाथ हटाकर श्वास को भीतर ही रोकें रहें, ध्यान रहे गुदा, द्वार बराबर ऊपर को खिंचा रहे, ढीला न होने पावे। श्वास रोक कर पेट के निचले भाग को गति दें अर्थात् पेट को अन्दर सिकोड़ें और बाहर को फेकें, निरन्तर पेट को गति देते रहें, मानों लिंग द्वारा कोई चीज
इच्छानुसार सन्तान
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वीरेन्द्र गुप्तः
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