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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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यदि तुम लड़कों को यह अधिकार है कि विवाह से पूर्व लड़कों को देखें, उसको परीक्षा लें और उसके पश्चात् अपना निर्णय दें। तो हम लड़कियों को भी यह अधिकार है कि तुम्हें देखें, परखें और अपना निर्णय दें। मेरा निर्णय यही है कि मैं तुम्हारे साथ विवाह कदापि नहीं कर सकता। मैं पूर्णरूपेण भारतीय हूँ और आप पूर्णरूपेण पश्चिमी। मैं विवाह को आत्मिक सम्बन्ध मानता हूँ जो मृत्यु के पश्चात् भी नहीं दृढ़ता। तुम्हारे समीप मेरा सबसे बड़ा गुण है मेरा गौरवण, भय कण्ठ। नर्कान कल को यदि मेरे चेचक निकल आये या किसी अन्य रोग के कारण मेरा रूप कुरूप हो जाय तो तुम्हारे नेत्र मुझे देखना भी पसन्द न करेंगे। जिसकी पसन्द ऐसी आँखों और कच्चों नाँवों पर हो, उसका क्या विश्वास? तुम में किताबों की योग्यता होगी, परन्तु मनुष्यत्व की नहीं।

आप कहेंगे तो क्या लड़कों को बिना देखे ही कुरूप आदि के साथ विवाह कर लें? नहीं मैं यह नहीं कहता, परन्तु लड़के लड़की को और लड़कों लड़के को जब तक देख करके दोनों एक दूसरे को सच पूर्वक पसन्द करके उत्तर न दें तब तक विवाह नहीं करना चाहिये। मनु जी कहते हैं कैसे रूप वाली कन्या से विवाह करें-

अव्यङ्गाङ्ग्यौ सौम्यनाम्नी हंसवारणागामिनीम्। तनुलोमकेशदशनां मुदङ्गीमुदहैत्त्रियम्॥

मनु ३/१०

अर्थ- सुन्दर आंगों वाली, अच्छे नाम वाली, हंस और गज के सद्गुण गमन करने वाली, पतले रोमाँचों वाली, बालों वाली, दौनों और कोमल शरीर वाली स्त्री से विवाह करें।

विवाह देशोन्नीति का मुख्य साधन है। क्योंकि भूमि पर जैसा बांया जाता है वैसा ही उत्पन्न होता है। यदि भूमि में उत्तम बीज बांया जायगा तो उत्तम ही अन्न उपजेंगा। इसी प्रकार स्त्री सन्तानोत्पत्ति के लिये भूमि है और पुरुष का वीर्य बीज रूप है।

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri