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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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क्षेत्र भूता स्मृता नारी बीज भूतः स्मृतः पुमान्।

क्षेत्र बीज समायोगत्संबधवः सर्वदेहिनाम्।।

मनु १/१३

अर्थ- खेत रूप स्त्री और बीज रूप पुरुष होता है। इस कारण खेत और बीज के मिलने से सम्पूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति होती है।

कामामरणात्तिष्ठेद् गृहे कन्यतुमत्यपि।

न चैवैनं प्रयच्छेत्तु गुणहीनाय कहिचित्।।

मनु १/८९

अर्थ- चाहे कन्या ऋतुवाली होकर मरने तक घर में बैठी रहे परन्तु गुणहीन के लिए इसका कभी दान न करे।

गुणहीन को कन्या देने से गुणहीन, दरिद्र सन्तान होगी। देश से दरिद्रता, गुणहीनता दूर करने के लिए गुणवान को ही कन्या का दान करे।

एक ओर पुरुष स्त्रियों को अपने से छोटा और दासी समझते हैं, तो दूसरी ओर स्त्रियाँ अपने समान अधिकारों की माँग करती हैं। परन्तु दोनों ही बातें मिथ्या हैं। क्योंकि दोनों के क्षेत्र अलग-अलग हैं और दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में बड़े हैं, पर साथ में एक बात और भी है जब तक दोनों रथ के पहियों के समान गृहस्थ रूपी रथ में एक साथ समानता को साथ लेकर नहीं चलेंगे तब तक गृहस्थ रूपी रथ चल नहीं सकता।

प्रजनाथं स्त्रियः सुष्ठः संतानाथं च मानवः।

तस्मात्साधरणो धर्मः श्रुतौपत्यसहोदितः।।

मनु १/९६

अर्थ- गर्भ धारण करने के लिए स्त्रियों को ईश्वर ने उत्पन्न किया है और वीर्य सन्तान के लिए पुरुष उत्पन्न किये हैं। इसी से स्त्री के साथ पुरुष का वेद में समान धर्म कहा है।

इच्छानुसारं सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri