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इच्छानुसार संतान

इच्छानुसार संतान

Ichhanusar Santan

बीरेन्द्र गुप्त (Virendra Gupta) द्वारा

स्रोत: Mumukshu Bhawan Varanasi Collection - इच्छानुसार सन्तान · अश्विनी कुमार, प्रकाशन मन्दिर / वीरेन्द्र नाथ (उद्गम)

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धनोपार्जन करना पुरुष का क्षेत्र है। सन्तानोत्पन्न करके उसका पोषण करना स्त्री का क्षेत्र है। गृहस्थ जीवन को सफल बनाने के लिए पुरुष को स्त्री का और स्त्री को पुरुष का मान करना चाहिए। जब तक दोनों के मन समान न होंगे तब तक गृहस्थ जीवन में सुख लाभ नहीं हो सकता। दोनों एक दूसरे को अपने ही समान जानें और देखें।


मनोवांछित सन्तान

सन्तान कितनी प्रिय वस्तु है। जिसके उत्पन्न होने से वंश वृद्धि होती है। आजकल देखने में आता है कि जब सन्तान बड़ी हो जाती है तो वह माता-पिता की आशा नहीं मानती और सामना करने के लिए आ जाती है। क्या कभी हमने बैठकर विचार किया कि इसका क्या कारण है। जब मैंने इस बात को विचारों, तो तत्काल मस्तिष्क में यह प्रश्न उठा कि सन्तान उत्पन्न की जाती है या हो जाती है। खोज करने पर ज्ञात हुआ कि पहले पूर्वज सन्तान को उत्पन्न करते थे, तभी उनके सद्गुण गुण वाली और आशानुसार कार्य करने वाली होती थी।

योगीराज श्रीकृष्ण तथा उनकी पत्नी रुक्मिणी दोनों ने १२ वर्ष का ब्रह्मचर्य व्रत धारण करके अपने रजः, वीर्य को शुद्ध पवित्र करके अपने सद्गुण प्रद्युम्न पुत्र को जन्म दिया। जिस समय प्रद्युम्न युवाकाल में आया उस समय यदि माता रुक्मिणी के सामने प्रद्युम्न अकेला आता था तो रुक्मिणी भ्रम में पड़ जाती थी कि यह पुत्र है या पति।

परन्तु आजकल सन्तान को कोई भी उत्पन्न नहीं करता। स्त्री पुरुष इन्द्रिय सुख के लिये ही समागम करते हैं और अनायास

इच्छानुसार सन्तान

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वीरेन्द्र गुप्तः

CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotri