ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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| मन्त्रप्रतीकानि | उ० | अ० | मु० | व० | खं० | प्र० | अनु० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| यदा लेलायते ह्यर्चिः | मुण्डक० | ... | १ | ... | २ | ... | ... | २ | २३८ |
| यं यं लोकं मनसा | ,, | ... | ३ | ... | १ | ... | ... | १० | २७२ |
| यः सर्वज्ञः सर्ववित् | ,, | ... | १ | ... | १ | ... | ... | ९ | २३६ |
| ,, ,, | ,, | ... | २ | ... | २ | ... | ... | ७ | २६१ |
| यस्मिन् द्यौः पृथिवी | ,, | ... | २ | ... | २ | ... | ... | ५ | २५९ |
| यस्याग्निहोत्रमदर्शम् | ,, | ... | १ | ... | २ | ... | ... | ३ | २३८ |
| यत्र सुप्तः | माण्डू० | ... | ... | ... | ... | ... | ... | ५ | २८८ |
| यदेतद्धृदयं मनश्चैतत् | ऐत० | ३ | ... | ... | १ | ... | ... | २ | ३२६ |
| यतो वाचो निवर्तन्ते | तैत्ति० | ... | ... | २ | ... | ... | ९ | १ | ४०३ |
| ,, ,, | ,, | ... | ... | २ | ... | ... | ४ | १ | ३८१ |
| यथाऽऽपः प्रवता | ,, | ... | ... | १ | ... | ... | ४ | ५ | ३४५ |
| यद् वै तत्सुकृतम् | ,, | ... | ... | २ | ... | ... | ७ | २ | ३९१ |
| यदा ह्येवैष | ,, | ... | ... | २ | ... | ... | ७ | ३ | ३९२ |
| ,, ,, | ,, | ... | ... | २ | ... | ... | ७ | ४ | ३९२ |
| यशो जनेऽसानि स्वाहा | ,, | ... | ... | १ | ... | ... | ४ | ४ | ३४४ |
| यश्छन्दसामृषभो विश्वरूपः | ,, | ... | ... | १ | ... | ... | ४ | १ | ३४१ |
| यदाऽऽत्मतत्त्वेन तु ब्रह्मतत्त्वम् | श्वे० | २ | ... | ... | ... | ... | ... | १५ | ४५७ |
| य एको जालवानीशत ईशनीभिः | ,, | ३ | ... | ... | ... | ... | ... | १ | ४५९ |
| यस्मात्परं नापरमस्ति | ,, | ३ | ... | ... | ... | ... | ... | ९ | ४६५ |
| य एकोऽवर्णो बहुधा | ,, | ४ | ... | ... | ... | ... | ... | १ | ४७३ |
| यदातमस्तन्न दिवा | ,, | ४ | ... | ... | ... | ... | ... | १८ | ४८६ |
| यच्च स्वभावं पचति | ,, | ५ | ... | ... | ... | ... | ... | ५ | ४९३ |
| यस्तन्तुनाभ इव तन्तुभिः | ,, | ६ | ... | ... | ... | ... | ... | १० | ५१० |
| यदा चर्मवदाकाशं | ,, | ६ | ... | ... | ... | ... | ... | २० | ५१८ |
| यस्य देवे पराभक्तिः | ,, | ६ | ... | ... | ... | ... | ... | २३ | ५२० |