ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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| मन्त्रप्रतीकानि | उ० | अ० | मु० | व० | खं० | प्र० | अनु० | मं० | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वह्नेर्यथा योनिगतस्य | श्वे० | १ | ... | ... | ... | ... | ... | १३ | ४४४ |
| वायुरनिलममृतमथेदम् | ईश० | ... | ... | ... | ... | ... | ... | १७ | ४३ |
| वायुर्यथैको भुवनम् | कठ० | २ | ... | २ | ... | ... | ... | १० | १५३ |
| वालाग्रशतभागस्य | श्वे० | ५ | ... | ... | ... | ... | ... | ९ | ४९७ |
| विद्यां चाविद्यां च | ईश० | ... | ... | ... | ... | ... | ... | ११ | ३६ |
| विज्ञानसारथिर्यस्तु | कठ० | १ | ... | ३ | ... | ... | ... | ९ | १२७ |
| विज्ञानात्मा सह | प्रश्न० | ... | ... | ... | ... | ४ | ... | ११ | २१२ |
| विश्वरूपं हरिणम् | ,, | ... | ... | ... | ... | १ | ... | ८ | १७८ |
| विज्ञानं ब्रह्मेति व्यजानात् | तैत्ति० | ... | ... | ३ | ... | ... | ५ | १ | ४११ |
| विज्ञानं यज्ञं तनुते | ,, | ... | ... | २ | ... | ... | ५ | १ | ३८३ |
| विश्वतश्चक्षुरुत | श्वे० | ३ | ... | ... | ... | ... | ... | ३ | ४६१ |
| वेदान्तविज्ञानसुनिश्चितार्थाः | मुण्डक० | ... | ३ | ... | २ | ... | ... | ६ | २७७ |
| वेदमनूच्याचार्यः | तैत्ति० | ... | ... | १ | ... | ... | ११ | १ | ३६२ |
| वेदाहमेतं पुरुषम् | श्वे० | ३ | ... | ... | ... | ... | ... | ८ | ४६४ |
| वेदाहमेतमजरम् | ,, | ३ | ... | ... | ... | ... | ... | २१ | ४७२ |
| वेदान्ते परमं गुह्यम् | ,, | ६ | ... | ... | ... | ... | ... | २२ | ५२० |
| वैश्वानरः प्रविशति | कठ० | १ | ... | १ | ... | ... | ... | ७ | ८० |
| व्रात्यस्त्वं प्राणैकर्षिरत्ता | प्रश्न० | ... | ... | ... | ... | २ | ... | ११ | १९१ |
| शतं चैका च हृदयस्य | कठ० | २ | ... | ३ | ... | ... | ... | १६ | १६७ |
| शतायुषः पुत्रपौत्रान् | ,, | १ | ... | १ | ... | ... | ... | २३ | ९२ |
| शान्तसंकल्पः सुमनाः | ,, | १ | ... | १ | ... | ... | ... | १० | ८३ |
| शीक्षां व्याख्यास्यामः | तैत्ति० | ... | ... | १ | ... | ... | २ | १ | ३३३ |
| शौनको ह वै महाशालः | मुण्डक० | ... | १ | ... | १ | ... | ... | ३ | २३१ |
| शं नो मित्रः | तैत्ति० | ... | ... | १ | ... | ... | १२ | १ | ३६८ |
| श्रवणायापि बहुभिः | कठ० | १ | ... | २ | ... | ... | ... | ७ | १०४ |