ईशादि नौ उपनिषद्

ईशादि नौ उपनिषद्
Ishadi Nau Upanishad
ऋषिगण द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished548 पृष्ठ
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( ७ )
प्रथम अध्याय
( प्रथम वल्ली )
| मन्त्र | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|
| १—४ | महर्षि उद्दालकके द्वारा यज्ञ करनेके अनन्तर दक्षिणाके रूपमें गोधन | |
| देते समय नचिकेतामें आस्तिकताका आवेश और पिता-पुत्र-संवाद ... | ७६ | |
| ५-६ | नचिकेताका धैर्यपूर्ण विचारपूर्वक पिताको आश्वासन देना ..... | ७९ |
| ७-८ | नचिकेताका यमलोक जाना और यमराजपत्नीद्वारा यमराजसे | |
| आतिथ्य-सत्कारके लिये प्रार्थना ..... | ८० | |
| ९ | यमराजद्वारा नचिकेताका सत्कार और तीन वर माँगनेके लिये कहना ... | ८२ |
| १०-११ | नचिकेताद्वारा प्रथम वरमें पितृ-परितोषकी याचना और यमराजद्वारा | |
| उक्त वर-प्रदान ..... | ८३ | |
| १२-१३ | नचिकेताद्वारा द्वितीय वरमें स्वर्गकी साधनभूत अग्निविद्याकी याचना ... | ८४ |
| १४-१९ | यमराजद्वारा फलसहित 'नाचिकेत' अग्निविद्याका वर्णन ..... | ८५ |
| २०-२२ | नचिकेताद्वारा तृतीय वरमें आत्मज्ञानके लिये याचना और यमराज- | |
| द्वारा आत्माके तत्त्वज्ञानकी कठिनताका प्रतिपादन तथा नचिकेताकी | ||
| दृढ़ताका वर्णन ..... | ८९ | |
| २३-२५ | यमराजका नचिकेताको आत्मतत्त्वविषयक प्रश्नके बदलेमें भाँति- | |
| भाँतिके प्रलोभन देना ..... | ९२ | |
| २६-२९ | नचिकेताकी परम वैराग्यपूर्ण उक्ति तथा आत्मतत्त्व जाननेका | |
| अटल निश्चय ..... | ९५ |
( द्वितीय वल्ली )
| १-२ | यमराजद्वारा ब्रह्मविद्याके उपदेशका आरम्भ और श्रेय-प्रेयका विवेचन ... | ९८ |
|---|---|---|
| ३-६ | आत्मविद्याभिलाषी नचिकेताके वैराग्यकी प्रशंसा तथा अविद्यामें | |
| रचे-पचे मनुष्योंकी दुर्दशाका कथन ..... | १०० | |
| ७-९ | आत्मतत्त्वको जाननेवालोंकी महिमा तथा तत्त्वज्ञानीकी दुर्लभताका | |
| वर्णन और नचिकेताकी प्रशंसा ..... | १०४ | |
| १०-११ | यमराजद्वारा अपने उदाहरणसे निष्कामभावकी महिमाका वर्णन | |
| एवं नचिकेताकी निष्कामताका वर्णन ..... | १०७ | |
| १२-१३ | परब्रह्म परमात्माकी महिमा ..... | १०९ |