भारतकोश
जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

पृष्ठ 11, कुल 56 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 11

JAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM तो मानव जीव की बुद्धि रत्न, जवाहर व माणिक्य जैसे पदार्थों से परिपूर्ण हो जाए। हे गुरु जी ! मुझे सिर्फ यही बोध करवा दो कि सृष्टि के समस्त प्राणियों को देने वाला निरंकार मुझ से विस्मृत न हो ॥ ६ ॥ जे जुग चारे आरजा होर दसूणी होए ॥ नवा खंडा विच जाणीऐ नाल चलै सभ कोए ॥ चंगा नाउ रखाइ कै जस कीरत जग लेइ ॥ जे तिस नदर न आवई त वात न पुछै के ॥ कीटा अंदर कीट कर दोसी दोस धरे ॥ नानक निरगुण गुण करे गुणवंतेआ गुण दे ॥ तेहा कोए न सुझई ज तिस गुण कोए करे ॥७॥ यदि किसी मनुष्य अथवा योगी की योग-साधना करके चार युगों से दस गुणा अधिक, अर्थात्-चालीस युगों की आयु हो जाए। नवखण्डों (पौराणिक धर्म-ग्रन्थों में वर्णित इलावृत, किंपुरुष, भद्र, भारत, केतुमाल, हरि, हिरण्य, रम्य और कुश) में उसकी कीर्ति हो, सभी उसके सम्मान में साथ चलें। संसार में प्रख्यात पुरुष बनकर अपनी शोभा का गान करवाता रहे। यदि अकाल पुरुष की कृपादृष्टि में वह मनुष्य नहीं आया तो किसी ने भी उसकी क्षेम 10 | Page sikhizm.com