भारतकोश
जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

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अमुल धरम अमुल दीबाण ॥ अमुल तुल अमुल परवाण ॥ अमुल बखसीस अमुल नीसाण ॥ अमुल करम अमुल फुरमाण ॥ अमुलो अमुल आखिआ न जाए ॥ आख आख रहे लिव लाए ॥ आखहे वेद पाठ पुराण ॥ आखहे पड़े करह वखिआण ॥ आखहे बरमे आखहे इंद ॥ आखहे गोपी तै गोविंद ॥ आखहे ईसर आखहे सिध ॥ आखहे केते कीते बुध ॥ आखहे दानव आखहे देव ॥ आखहे सुर नर मुन जन सेव ॥ केते आखहे आखण पाहे ॥ केते कह कह उठ उठ जाहे ॥ एते कीते होर करेहे ॥ ता आख न सकह केई केए ॥ जेवड भावै तेवड होए ॥ नानक जाणै साचा सोए ॥