भारतकोश
जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

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JAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM जे को आखै बोलुविगाड़ ॥ ता लिखीऐ सिर गावारा गावार ॥२६॥ निरंकार के जिन गुणों को कथन नहीं किया जा सकता वे अमूल्य हैं, और इस निरंकार का सुमिरन अमूल्य व्यापार है । यह सुमिरन रूपी व्यापार का मार्गदर्शन करने वाले संत भी अमूल्य व्यापारी हैं और उन संतों के पास जो सद्गुणों का भण्डार है वह भी अमूल्य है । जो व्यक्ति इन संतों के पास प्रभु-मिलाप हेतु आते हैं वे भी अमूल्य हैं और इनसे जो गुण ले जाते हैं वे भी अमूल्य हैं । परस्पर गुरु-सिख का प्रेम अमूल्य है, गुरु के प्रेम से आत्मा को प्राप्त होने वाला आनंद भी अमूल्य है । अकाल-पुरुष का न्याय भी अमूल्य है, उसका न्यायालय भी अमूल्य है । अकाल पुरुष की न्याय करने वाली तुला अमूल्य है, और जीवों के अच्छे-बुरे कर्मों को तोलने हेतु परिमाण (तौल) भी अमूल्य है । अकाल पुरुष द्वारा प्रदान किए जाने वाले पदार्थ भी अमूल्य हैं और उन पदार्थों का चिन्ह भी अमूल्य है । निरंकार की जीव पर होने वाली कृपा भी अमूल्य है तथा उसका आदेश भी अमूल्य है । वह परमात्मा अति अमूल्य है उसका कथन घनिष्ठता से कर पाना असम्भव है । परंतु फिर भी अनेक भक्त जन उसके गुणों का व्याख्यान करके अर्थात् उसकी स्तुति कर-करके भूत, भविष्य व वर्तमान काल में उसमें लिवलीन 37 | Page sikhizm.com