भारतकोश
जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)

Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary

श्री गुरु नानक देव जी द्वारा

DevanagariHindipublished56 पृष्ठ

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तिथै जोध महाबल सूर ॥ तिन मह राम रहिआ भरपूर ॥ तिथै सीतो सीता महिमा माहे ॥ ता के रूप न कथने जाहे ॥ ना ओह मरह न ठागे जाहे ॥ जिन कै राम वसै मन माहे ॥ तिथै भगत वसह के लोअ ॥ करह अनंद सचा मन सोए ॥ सच खंड वसै निरंकार ॥ कर कर वेखै नदर निहाल ॥ तिथै खंड मंडल वरभंड ॥ जे को कथै त अंत न अंत ॥ तिथै लोअ लोअ आकार ॥ जिव जिव हुकम तिवै तिव कार ॥ वेखै विगसै कर वीचार ॥ नानक कथना करड़ा सार ॥३७॥ जिन उपासकों पर परमेश्वर की कृपा हुई उनकी वाणी शक्तिवान हो जाती है। जहाँ पर ये उपासक विद्यमान होते हैं वहाँ पर कोई और नहीं होता। उन उपासकों में देह को जीतने वाले योद्धा, इन्द्रियों को