जपजी साहिब (श्री गुरु नानक देव जी - मूल बाणी एवं हिन्दी अनुवाद)
Japji Sahib of Guru Nanak Dev Ji with Hindi Commentary
श्री गुरु नानक देव जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंJAPJI SAHIB HINDI SIKHIZM.COM जीतने वाले महाबली तथा मन को जीतने वाले शूरवीर होते हैं। उन में प्रभु राम परिपूर्ण रहते हैं। उन निर्गुण स्वरूप राम के साथ महिमा रूपी सीता चन्द्रमा समान प्रकाशमान व मन को शीतल करने वाली है। ऐसा स्वरूप प्राप्त करने वालों के गुण कथन नहीं किए जा सकते। वे उपासक न तो मरते हैं और न ही ठगे जाते हैं, जिनके हृदय में परमात्मा राम का स्वरूप विद्यमान होता है। वहाँ कई लोकों के भक्त निवास करते हैं। जिनके हृदय में सत्यस्वरूप निरंकार वास करता है, वे आनंद प्राप्त करते हैं। सत्य धारण करने वालों के हृदय (सचखण्ड) में वह निरंकार निवास करता है; अर्थात् वैकुण्ठ लोक, जहाँ सद्गुणी व्यक्तियों का वास हैं, में वह सर्गुण स्वरूप परमात्मा रहता है। यह सृजनहार परमात्मा अपनी सृजना को रच-रचकर कृपा-दृष्टि से देखता है अर्थात् उसका पोषण करता है। उस सचखण्ड में अनन्त ही खण्ड, मण्डल व ब्रह्माण्ड है। यदि कोई उसके अन्त को कथन करे तो अन्त नहीं पा सकता, क्योंकि वह असीम है। वहाँ अनेकानेक लोक विद्यमान है और उनमें रहने वालों के अस्तित्व भी अनेक हैं। फिर जिस तरह वह सर्वशक्तिमान परमात्मा आदेश करता है उसी तरह वे कार्य करते हैं। अपने इस रचे हुए प्रपंच को देख कर व शुभाशुभ कर्मों को विचार कर वह प्रसन्न होता है। गुरु नानक जी कहते हैं कि उस 53 | P a g e sikhizm.com