जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचतुमट्ठ ] २६७ नीम के साथ रहने से, तेन उस कारण से यह अम्बो कटुकप्फलो, अस्वादिष्ट- फल, कडुवे फल वाला हो गया। राजा ने उसकी बात सुन सभी नीम तथा कड़वी लताएँ कटवा कर, जड़े उखड़वा कर, चारो ओर से अमधुर बालू हटवा कर, उसकी जगह मधुर बालू डलवा कर, दुग्ध-जल से, शक्कर-जल से तथा सुगन्धित जल से आम की सेवा कराई। मधुर रस के संसर्ग से यह फिर मधुर हो गया। राजा ने जो पहला माली था, उसीको उद्यान सौंप दिया। आयु भर जी कर वह कर्मानुसार परलोक सिधारा। शास्ता ने यह धर्मदेशना ला जातक का मेल बैठाया। उस समय मै ही पण्डित अमात्य था। १८७. चतुमट्ठ जातक “उच्चे विटभिमारुह...” यह शास्ता ने जेतवन में विहार करते समय एक बूढ़े भिक्षु के बारे मे कही। क. वर्तमान कथा एक दिन जब दोनो प्रधान शिष्य बैठे एक दूसरे से प्रश्नोत्तर कर रहे थे, एक बूढा उनके पास गया और उन दोनो में स्वयं तीसरा बन धंट कर बोला— भन्ते ! हम भी आपसे प्रश्न पूछेंगे। आप भी हमसे अपनी शंकाएँ निवारण करें। स्थविर उसके प्रति घृणा प्रकट करते हुए उठ कर चले गए। स्थविरो