भारतकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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चुल्लपदुम ] २७१ १९३. चुल्लपदुम जातक "अयमेव सा अहमपि सो अनञ्जो...." यह शास्ता ने जेतवन में विहार करते हुए, उद्विग्नचित्त भिक्षु के बारे मे कही। क. वर्तमान कथा यह कथा उम्मद्दन्ति जातक¹ में आयेगी। शास्ता ने पूछा-"भिक्षु ! क्या तू सचमुच उद्विग्न-चित्त है ?" "भगवान् ! सचमुच ।" "तुझे किसने उद्विग्न किया है ?" "भन्ते ! मै एक अलङ्कृत सजीधजी स्त्री को देख कर आसक्त होने के कारण उद्विग्न हुआ हूँ।" "भिक्षु ! स्त्री अकृतज्ञ होती है, मित्रद्रोही होती है, कठोर हृदया होती हैं। पुराने पण्डित दाहिनी जांघ का लहू पिलाकर भी, जीवनदान देकर स्त्री का चित्त न जीत सके।" शास्ता ने यह कह पूर्व-जन्म की कथा कही- ख. अतीत कथा पूर्व समय में वाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्त्व उसकी पटरानी की कोख से पैदा हुए। नामकरण के दिन उसका नाम पदुम- कुमार रक्खा गया। उसके और छ भाई थे। यह सातो जने क्रम से बडे हो, विवाह कर राजा के मित्रो की तरह रहने लगे। ¹ उम्मद्दन्ति जातक (५२७)