भारतकोश
जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा

स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)

DevanagariHindipublished479 पृष्ठ

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२८८ [ २.५.१९४ ब्राह्मण-गृहपति आदि देवेन्द्र शक्र को देखकर प्रसन्न हुए—अधार्मिक राजा मारा गया। अब हमें शक्र का दिया हुआ धार्मिक राजा प्राप्त हुआ। शक्र ने भी आकाश में खड़े हो कहा—"यह शक्र का बनाया हुआ राजा अब से धर्मपूर्वक राज्य करेगा। यदि राजा अधार्मिक होता है तो वर्षा असमय होती है, समय पर नहीं होती है, अकाल-भय, रोग-भय तथा शस्त्र-भय बना ही रहता है।" इस प्रकार उपदेश देते हुए शक्र ने दूसरी गाथा कही— अकाले वस्सति तस्स काले तस्स न वस्सति सग्गा च चवतिट्ठना ननु सो तावता हतो ॥ [ उसके राज्य में असमय वर्षा होती है, समय पर नहीं होती। वह स्वर्ग- स्थान से गिरता है। निश्चय से वह उतने से मारा गया।] अकाले, अधार्मिक राजा के राज्य करने के समय—अनुचित समय पर खेती के पकने के समय या कटाई तथा मर्दन करने के समय देव वस्सति। काले, योग्य समय पर, बोने के समय, खेती छोटी रहने के समय वा दाना पड़ने के समय न वस्सति। सग्गा च चवतिट्ठना, स्वर्ग-स्थान से अर्थात् देवलोक से। अधार्मिक राज अप्रतिलाभ होने से देवलोक से च्युत होता है। यह भी अर्थ है कि स्वर्ग में भी राज्य करता हुआ अधार्मिक राजा वहाँ से च्युत होता है। ननु सो तावता हतो, निश्चय से वह अधार्मिक राजा इस से मारा जाता है। अथवा "नु" यहाँ एकान्तवाची है, न केवल वह इतने से मारा गया, बल्कि वह आठ महा नरकों में तथा सोलह उस्सद नरकों में चिरकाल तक भाग जाएगा। इस प्रकार शक्र जन-समूह को उपदेश दे अपने देवस्थान को ही चला गया। बोधिसत्व ने भी धर्म से राज्य करते हुए स्वर्ग-मार्ग को भरा। शास्ता ने यह धर्मदेशना ला जातक का मेल बैठाया। उस समय अधार्मिक राजा देवदत्त था। शक्र अनुरुद्ध था। सुजाता राहुल-माता थी। शक्र का बनाया हुआ राजा तो मैं ही था।