जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
DevanagariHindipublished479 पृष्ठ
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दूसरा परिच्छेद ६. उपाहन वर्ग २३१. उपाहन जातक "यथापि फीता " यह शास्ता ने वेळुवन म रहने समय, देवदत्त के बारे में कही। क. वर्तमान कथा धर्मसभा में भिक्षुओ ने बातचीत चलाई—आयुष्मान् ! देवदत्त आचार्य्य को छोड़, तथागत का विरोधी शत्रु बन विनाश को प्राप्त हुआ। शास्ता ने आकर पूछा—भिक्षुओ, यहाँ बैठे क्या बातचीत कर रहे हो ? 'अमुक बातचीत' । शास्ता न, 'भिक्षुओ, न केवल अभी देवदत्त आचार्य्य को त्याग, मेरा विरोधी बन महाविनाश को प्राप्त हुआ, वह पहले भी हुआ है' कह पूर्व-जन्म की कथा कही— ख. अतीत कथा पूर्व समय में वाराणसी में ब्रह्मदत्त के राज्य करने के समय बोधिसत्व हथवानों के कुल में पैदा हो, बड़े होने पर हस्ति शिल्प में पारङ्गत हो गए। काशी के एक गामडे के माणवक ने आकर उनसे विद्या सीखी। बोधिसत्व शिल्प सिखाते हुए आचार्य्य-मुट्ठी¹ नहीं रखते। जो जो जानते हैं, वह सब सिखा देते हैं। उस माणवक ने बोधिसत्व की सारी विद्या सीख चुकने पर
¹विद्या को छिपा कर रखना।