जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
भगवान बुद्ध / पालि त्रिपिटक द्वारा
स्रोत: जातक कथाएँ (पालि से प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद) · हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग · 1956 (उद्गम)
पृष्ठ 8, कुल 479 में से
संदर्भ में पढ़ें[ १२ ] विषय पृष्ठ १५०. सञ्जीव जातक .. .. .. .. १३४ [ विद्यार्थी ने मुर्दे को जिलाने का मन्त्र तो सीखा किन्तु उसे फिर मुर्दा बनाने का नही । एक व्याघ्र ने उसकी हत्या की । ] दूसरा परिच्छेद १३६ १. दळ्ह वर्ग १३६ १५१. राजोवाद जातक .. .. .. .. १३६ [ मल्लिक राजा 'जैसे को तैसा' था, किन्तु काशी नरेश बुराई को भलाई से जीतता था । वही बडा सिद्ध हुआ । ] १५२. सिगाल जातक .. .. .. .. १४४ [ सियार ने सिंह-बच्ची से प्रेम-निवेदन किया । उसने अपने भाइयो से शिकायत की । सियार को मार डालने के प्रयत्न मे सातो शेर मर गए । ] १५३. सूकर जातक .. . . १४८ [ सुअर ने शेर को युद्ध के लिए ललकारा । शेर लडने आया; किन्तु उसके बदन की गन्दगी के कारण बिना लडे ही सुअर को विजयी मान चला गया । ] १५४. उरग जातक .. .. .. .. १५२ [ बोधिसत्त्व ने गरुड़ से नाग की रक्षा की । ] १५५. गग्ग जातक .. .. .. . १५५ [ छींक आने पर 'जीवें' और 'जीवो' कहने की प्रथा कैसे चली ? ]