भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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सरलार्थः, ७२ श्लोकोक्तविषय एव पुनरुक्त इवाभाति ॥ ८१ ॥ पूर्णचन्द्रमा शुभवर्गमें प्राप्त हो उसको शुभग्रह देखते हों तो जातकके निःशेष अरिष्टका उस प्रकार नाश करता है जैसे जहरीले सर्पका गरुड नाश करता है ॥ ८१ ॥ अथ राशीशकृतोऽरिष्टभङ्गः । चन्द्राधिष्ठितराशीशे लग्नस्थे शुभवीक्षिते ॥ भृगुणा वीक्षिते चन्द्रे स्वोच्चेऽरिष्टं हरेत्तदा ॥ ८२ ॥ चन्द्रो यस्मिन् राशावधिष्ठितो भवेत्तस्य राशेरीशे = स्वामिनि, लग्नस्थे = जन्मलग्नगते शुभग्रहेण वीक्षितेऽवलोकिते च, तथा चन्द्रे स्वोच्चे = वृषराशिगते तथाभूते भृगुणा = शुक्रेण वीक्षिते च जातस्यारिष्टं हरेन्नाशयेदिति ॥ ८२ ॥ चन्द्रराशीश लग्नमें हो उसको शुभग्रह देखते हों और उच्चस्थ चन्द्रमा शुक्रसे देखा जाता हो तो अरिष्टको हरता है ॥ ८२ ॥ अथ लग्नेशकृतोऽरिष्टभङ्गः ।