जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें" (split as उदयात् इति -> उदयादिति). There is definitely NO 'र' there grammatically! But what does the print have? It is a tiny speck or smudge below the vertical stem of 'या'. It's best written as "यादिति ।".
Let's double check L25: "राजशासनकर्त्तृकं मरणं ( फांसी ) स्यात् ।" Is there space around फांसी? "( फांसी )" or "(फांसी)"? There is a space: "( फांसी )".
Let's check L27: “मान्द्यारूढनवांशकामगृहगाः सौम्याः सुमृत्युप्रदाः, Double quote at start.
Let's check L30: राहुः पन्नगदंशनान्मरणदो यद्वा विषस्पर्शनात् ॥” इति ॥ ७३ ॥ End quote before इति.
Let's check L12-13: “द्वाविंशः कथितस्तु कारणं द्रेष्काणो निधनस्य सूरिभिः । तस्याधिपतिर्भपोऽपि वा निर्वाणं स्वगुणैः प्रयच्छति ॥” इति ॥ ७२ ॥
All looks very accurate and faithful to the original print.आयुर्दायाध्यायः ॥ ५ ॥ १४७ चाहिये। रात्रिके जन्ममें चन्द्रमा और राहुके योगसे जो नक्षत्र मिले उसकी दशा निर्वाणकी प्रथम दशा जाने