भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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२३२ सटीकजातकापारिजाते- परचैतन्मतं नाचार्गाभिमतम् । अत एवाह-उक्तप्रसिद्धा न ते । येषामिदमभिमतं 'केन्द्रनवांशकेष्विति' ते आचार्याः, उक्तप्रसिद्धाः=उक्तापदेशे प्रसिद्धा मान्या न सन्तीति ॥ ८३॥ सूर्यको छोड़कर भौमादिकमें से कोई ग्रह चन्द्रमासे दूसरे हो तो सुनफा योग होता है । सूर्यके अतिरिक्त चन्द्रमासे १२ वें कोई ग्रह हो तो अनफा योग होता है । चन्द्रमासे दूसरे और बारहवें सूर्यको छोड़कर कोई ग्रह हों तो दुरुधुरा योग होता है। यदि चन्द्रमासे २ रे और १२ वें कोई भी ग्रह न हो तो केमद्रुम योग होता है। यदि केन्द्रमें चन्द्रमा हो वा अन्य कोई ग्रह हो तो केमद्रुम योगका भंग हो जाता है । किसी का मत है कि चन्द्रमासे केन्द्र और नवांशमें भी वे योग होते हैं । परन्तु यह मत प्रसिद्ध नहीं है । संस्कृत टीका देखिये ॥ ८३ ॥ यहां प्रसंगवश बृहज्जातकोक्त- “त्रिंशत् सरूपाः सुनफान्फाख्याः षट्त्रिंशयं धौग्धरे प्रभेदाः । इच्छाविकल्पैः क्रमशोऽभिनीय नीते निवृत्तिः पुनरन्यनीतिः ।” इस वचनका स्पष्टीकरण दिखलाता हूं-सुनफा, और अनफा योगके ३१ भेद हैं । दुरुधुरा योगके १८० भेद हैं । इच्छाविकल्पसे उन विकल्पोके बनानेसे निवृत्ति होती है और रीति स्थानान्तर चालानकी होती है । यथा-सुनफा और अनफा योग मङ्गल-बुध-बृहस्पति-शुक्र-शनि इन पाँच ग्रहों से होते हैं। अतः इच्छा विकल्प पांच | ५ | ४ | ३ | २ | १ | हुए । अतः प्रस्तारकी रीतिसे १।५।१०।१०।५।१ इन अङ्कोंके भेद प्रथम | १ | २ | ३ | ४ | ५ | विकल्प ५, द्वितीय १०, तृतीय १०, चतुर्थ ५, पञ्चम १, इस प्रकारसे योग ३१ हुए । प्रथम विकल्प-चन्द्रमासे २ रे-मं. बु. बृ. शु. श. ये ग्रह एक १ हों तो प्रथम विक- ल्पके पांच भेद हैं । द्वितीय विकल्प-मं. बु., मं. बृ., मं. शु., मं. श. । बु. बृ., बु. शु., बु. श. । बृ. शु., बृ. श. । शु. श. । इस प्रकार दूसरा विकल्प १० प्रकारके हुए । तृतीय विकल्प-मं. बु. बृ., मं. बु. शु., मं. बु. श., मं. बृ. शु., मं. बृ. श., मं. शु. श. । बु. बृ. शु., बु. बृ. श., बु. शु. श. । बृ. शु. श. इस प्रकार तीसरा विकल्प १० प्रकारके हुए । चतुर्थ विकल्प-मं. बु. बृ. शु., मं. बु. बृ. श., मं. बृ. शु. श., मं. बु. शु. श., बु. बृ. शु. श. इस प्रकार चौथे विकल्पके पाँच भेद हुए । पञ्चम विकल्प-मं. बु. बृ. शु. श. इस प्रकार पाँचवें विकल्पका १ भेद हुआ । इन पांच विकल्पोंसे सुनफा योगके ३१ भेद हुए । इसी प्रकार ३१ भेद अनफा योगके भी होते हैं । दुरुधुरा योगके २० भेद एक स्थानमें एक ग्रह रहनेसे-

चन्द्रसे २ रे स्थानमेंचन्द्रसे १२ वें स्थानमेंभेद संख्याचन्द्रसे २ रे स्थानमेंचन्द्रसे १२ वें स्थानमेंभेद संख्या
मं.बु.बु.शु.११
बु.मं.शु.बु.१२
मं.बृ.बु.श.१३
बृ.मं.श.बु.१४
मं.शु.बृ.शु.१५
शु.मं.शु.बृ.१६
मं.श.बृ.श.१७
श.मं.श.बृ.१८
बु.बृ.शु.श.१९
बृ.बु.१०श.शु.२०