भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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२६८ सटीकजातकपारिजाते-

मं. बृ. शु. ( २५ ) चं. मं. बृ. श. ( २६ ) चं. मं. शु. श. ( २७ ) चं. बु. बृ. शु. ( २८ ) च. बु. बृ. श. ( २९ ) चं. बु. शु. श. ( ३० ) चं. बृ. शु. श. ( ३१ ) मं. बु. बृ. शु. ( ३२ ) मं. बु. बृ. श. ( ३३ ) मं. बु. शु. श. ( ३४ ) मं. बृ. शु. श. ( ३५ ) बु. बृ. शु. श., इति ३५ भेदा जायन्ते, तेषु-२६, ३३, ३४, तमभेदास्त- त्फलानि चात्र नोक्तानि । शेषं सर्वं स्पष्टमेवेति ॥ १५-२५ ॥ एक राशिमें सूर्य, चन्द्रमा, मंगल और बुध हों तो जातक मायावी, प्रपञ्ची, लेखक और रोगी होवे । चन्द्रमा, मंगल, सूर्य और बृहस्पतिके एकराशिस्य होने से जातक धन- वान्, यशस्वी, बुद्धिमान्, राजाका प्रिय करनेवाला, निरोग और निश्चिन्त होता है ॥१५॥ मंगल, सूर्य, चन्द्रमा और शुक्रके एक राशिमें होनेसे पुत्र-स्त्री-धनसे युक्त, विद्वान्, अल्पभोजी, सुखी, कार्योंमें निपुण और कृपालु होता है । सूर्य, चन्द्रमा, शनि और मंगलसे चञ्चल नेत्रवाला, घूमने वाला, व्यभिचारिणी स्त्रीका स्वामी, और निर्धन होता है ॥ १६ ॥ एक राशिस्थ बुध, चन्द्र, सूर्य और गुरु होनेसे जातक मित्र-पुत्र-स्त्रीसे युत, धनवान्, गुणी, यशस्वी, बलवान् और उदार होवे । शुक्र, चन्द्रमा, सूर्य और बुध एकत्र हों तो विकल और वाचाल होवे । शनि, चन्द्र, सूर्य और बुध एकत्र हों तो निर्धन और कृतघ्न होवे । सूर्य, चन्द्रमा, बृहस्पति और शुक्र एकत्र हों तो जलमें, वन्यस्थलमें चलनेवाला, राज- पूज्य और भोगी हो । सूर्य, चन्द्र, गुरु और शनि एक राशिस्थ हों तो विशाल नेत्र, बहुत धन पुत्र से युत हो और वेश्याका पति होवे ॥ १८ ॥ शनि, चन्द्रमा, सूर्य और शुक्र एक राशिस्थ हों तो निर्बल, डरपोक, कन्याओंके द्वारा धनोपार्जन और खाने पीने में तत्पर होता है । मंगल, सूर्य, बुध और गुरु एकत्र हों तो सबल, विपत्तिसे युक्त, स्त्री-सम्पत्तिवाला, नेत्र रोगी, और भ्रमणशील होता है ॥ १९ ॥ सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र के एकत्र रहनेसे दूसरेकी स्त्रीमें लीन, विषमनेत्र (छोटा बड़ा नेत्र, या टेढ़ा नेत्र) चोर बुद्धि, धनादिसे रहित होता है । सूर्य, मंगल, बुध और शनि एक राशिमें हों तो सेनापति वा राजमंत्री, नीच कर्म करनेवाला और भोगी होता है ॥२०॥ सूर्य, मंगल, बृहस्पति और शुक्रके एकत्र होनेसे राजाके सदृश, विख्यात, विशेष पूज्य और धनी होता है । बृहस्पति, मंगल, शनि और सूर्य एक राशिमें हों तो निर्धन, भ्रान्त हो तथा मित्र और परिवारवाला होवे । मंगल, सूर्य, शुक्र और शनि एक राशिस्थ हों तो हारनेवाला, कुकर्मियोंमें प्रधान होवें । शुक्र, सूर्य, बुध और गुरु एकत्र हों तो धन और यशमें मुख्य, लोकमें प्रधान होवे ॥ २१ ॥ बृहस्पति, शनि, बुध, और सूर्यके योगसे झगड़ालु, मानी और दुराचारी होता है । शनि, बुध, सूर्य और शुक्रके योगसे सुन्दरमुख, सत्यव्रत, और आचारवान् होता है । सूर्य, शनि, बुध और शुक्र एकत्र हों तो कलामें निपुण, नीचोंका मालिक और साहसी होता है । बृहस्पति, चन्द्रमा, बुध और मंगल एकत्र हों तो राजाका प्रिय करनेवाला, मंत्री, कवि और राजा होता है ॥ २२ ॥ चन्द्रमा, मंगल, बुध और शुक्र एकत्र हों तो सुन्दरी स्त्री-सुन्दर पुत्रसे युत, बुद्धिमान्, विरूप और सुखी होता है । शनि, मंगल, चन्द्रमा और बुध एकत्र हों तो जातक दो माता पितावाला, पराक्रमी और विशेष स्त्री-पुत्रवाला होता है । चन्द्रमा मंगल बृहस्पति और शुक्र एकत्र हों तो पापकर्ममें निपुण, निद्रालु और धनादिमें आतुर होता है । बृहस्पति, मंगल, सूर्य और चन्द्रमा एक राशिमें हों तो स्थिर बुद्धि, पराक्रमी सुखी और पण्डित होता है । शुक्र, बुध, चन्द्रमा और बृहस्पतिके योगसे बधिर, विद्वान्, यशस्वी और धनी होता है । चन्द्रमा, शनि, बुध और गुरु एक राशिमें हों तो बड़ा धनी, बन्धुप्रिय, और धार्मिक होता है । शुक्र, बुध, शुक्र और शनिके एकत्र होनेसे बहुत जनसमूहोंका वैरी, दूसरेकी स्त्रीका प्रेमी होता है । बृहस्पति, चन्द्रमा, शनि और शुक्र एक राशिमें हों तो सुख और श्रद्धा-दयासे हीन होता है ॥ २४ ॥ मंगल, बुध, गुरु और शुक्रके एकत्र होनेसे धनवान् और निन्दित होता है ।