जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंन्नध्याये पूर्णतां गता ॥ ८ ॥" Wait, "अष्टमे ग्रहयोगोऽस्मिन्नध्याये"? Wait, look at: "अष्टमे" or "अष्टमो"? Letters: अ - ष्ट - मे (or अ - ष्ट - मो) Wait, look at the matra: there is an 'ए' matra on 'म'? Or 'ओ' matra? It has a top stroke to the left: 'अष्टमे'. But wait, "अष्टमो ग्रहयोगोऽस्मिन्नध्याये"? Wait, look at 'मे': it is 'अष्टमे'. And "ग्रहयोगोऽस्मिन्नध्याये" -> ग्रहयोगो + अस्मिन् + अध्याये. "पूर्णतां गता ॥ ८ ॥" (because टीका is feminine: सुधा टीका... पूर्णतां गता).
Now let's check line 31: सूर्य नीच राशिमें हो तो पतित, बन्धुहीन और प्रवासी हो । चन्द्रमा नीच राशिमें हो Let's check line 32: तो रोगी, अल्प पुण्यवाला और धनवान् हो । मङ्गल हो तो कृतघ्न और धनी हो । बुध हो Let's check line 33: तो क्षुद्र, बन्धुओंसे विरोध करनेवाला हो । बृहस्पति हो तो अपवादी तथा खल हो । शुक्र Let's check line 3