जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलोभी, चंचल बुद्धि, कृश, रोग युक्त शरीर, क्रोधी और वैद्य"
Line 21: "हो । धाता संवत्में जन्म हो तो दूसरोंकी स्त्रीमें रत, कार्य-अर्थवादी और शठ हो ॥ १२ ॥"
Line 22: "ईश्वर संवत्में जायमान हो तो श्रीमान्, बलवान्, बुद्धिमान् और गुणग्राही हो । बहु-"
Line 23: "धान्य संवत्में उत्पन्न हो तो सत्कर्मी, भोगी, वाणिज्य करनेवाला हो । प्रमाथि संवत्में"
Line 24: "जन्म हो तो क्रूर, पापी, क्रोधी, बिना बन्धुका और सुखी हो । यदि विक्रम संवत्में जन्म हो"
Line 25: "तो धनी, सेनापति और पराक्रमी हो ॥ १३ ॥"
Line 26: "वृष संवत्में उत्पन्न हो तो दरिद्र, निर्लज्ज और कर्महीन हो । चित्रभानु संवत्में उत्पन्न"
Line 27: "हो तो सूर्यके तुल्य तेजवान् और रूपवान् हो । यदि सुभानुमें जन्म हो तो निज कुलकी"
Line 28: "विद्या और [आचारसे युक्त हो । तारण संवत्में जन्म हो तो बहुत धनी, बली और" Wait! Look at "[आचारसे": Is that a bracket before आचारसे? Look at