जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउक्ष्णस्तु"? Wait, between स्यात् and उक्षणस्तु: There is a space. Then 'उ', then 'क्ष', then 'ण', then 'स्तु'. Wait, look at the meter: मे-ष-स्य धा-तु-क-र-र-त्न-ध-रा-त-लं स्या- दु-क्ष्ण-स्तु सा-नु-कृ-षि-गो-कु-ल-का-न-ना-नि Wait! If it is स्यादुक्ष्णस्तु: स्या (G) दु (L) क्ष्ण (G) स्तु (G) सा (G) नु (L) कृ (L) षि (L) गो (G) कु (L) ल (L) का (G) न (L) ना (G) नि (L) Wait, Vasantatilaka is: त-भ-ज-ज-ग-ग: त: G G L भ: G L L ज: L G L ज: L G L ग: G ग: G Total: 14 syllables. Let's see: दु (L) क्ष्ण (G) स्तु (G) -> no, if it's "उक्षणस्तु": उ (L) क्ष (G) ण (L) स्तु (G) सा (G) नु (L) कृ (L) षि (L) गो (G) ... Wait, let's scan: उ