जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंराशीशीलाध्यायः ॥ १ ॥ इस राशि चक्रका न्यास काल पुरुषके शरीरमें इस प्रकार से विद्यमान है मेष शिर, वृष मुख, मिथुन स्तनमध्य, कर्क हृदय, सिंह उदर (पेट), कन्या कमर, तुला नाभिके नीचे (पेड़ू), वृश्चिक लिंग, धनु ऊरु, मकर दोनों घुटने, कुंभ दोनों जांघें और मीन दोनों पैर हैं। राशि चक्रके अङ्ग विभागका तात्पर्य यह है कि जन्म अथवा प्रश्न वा गोचरमें जो राशि पापाक्रान्त हो उस राशिवाले अङ्गमें तिल वा चोट या मासा आदिका चिह्न होगा। जो राशि शुभ ग्रहसे युक्त हो वह अङ्ग पुष्ट होगा यह विशेष रूपसे स्मरणीय है ॥ ८ ॥ अथ मीनादीनां स्वरूपवर्णनम्। व्यस्तोभयपुच्छमस्तकयुतौ मीनौ सकुम्भो नर- स्तौली चापधरस्तुरङ्गजघनो नक्रो मृगास्यो भवेत् ॥ वीणादण्डं सगदं नृयुग्ममबला नौस्था ससस्यानला शेषाः स्वस्वगुणाभिधानसदृशाः सर्वे स्वदेशाश्रयाः ॥ ६ ॥ मीनौ = द्वौ मत्स्यौ, व्यस्तोभयपुच्छमस्तकयुतौ = अन्योन्यं मुखपुच्छसम्मिलितौ यथा भवतस्तद्रूपं मीनराशेर्ज्ञेयम् । सकुम्भो नरः = स्कन्धावहतरिक्तकलशो नरो