भारतकोश
जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary

वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा

DevanagariHindipublished588 पृष्ठ

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३५० सटीकजातकपारिजाते- लग्नको देखनेवाला, लग्नेश और लग्नमें स्थित ये तीनों ग्रह यदि छठे आठवें, और बार- हवें भावके स्वामी हों, शत्रुगृह-नीचस्थ या दुर्बल हों तो वे ग्रह अपनी दशामें अपने अपने फलको नहीं देते । यहां लग्नको देखनेवाले तथा लग्नमें रहनेवाले अधिक ग्रह हों तो उनमें बलीका ही ग्रहण करना चाहिये । सु० शा० कारः ॥ २८ ॥ लग्ने जलर्क्षे शुभखेचरैन्द्रैर्युक्ते तनोः स्थौल्यमुदाहरन्ति । लग्नाधिपे तोयखगे बलाढ्ये सौम्यान्विते तत्तनुपुष्टिमाहुः ॥ २९ ॥ लग्न इति । जलर्क्षे = जलचरराशिके, ( १ अ. १७ श्लोक. द्र. ) लग्ने तस्मिन् शुभखे- चरैन्द्रैः = बुधगुरुभृगुभिर्युक्ते जातस्य तनोः = शरीरस्य, स्थौल्यं = पीनत्वम्, उदाहरन्ति = कथयन्त्याचार्याः । अथ लग्नाधिपे = जन्मलग्नेशे तोयखगे = जलचरर्क्षगतग्रहे, बलाढ्ये = पूर्वोक्त