जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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Now let's check L37: "लग्नाद्वन्धुदिनेशतः पितृसुखं जीवात्मजस्थानतः" लग्नाद् ( - - ) बन्धु ( - . ) दिने ( . - ) शतः ( . - ) -> wait, लग्नाद्बन्धुदिनेशतः पितृसुखं जीवात्मजस्थानतः लग्नाद् ( - - ) बन् ( - ) धु ( . ) दि ( . ) ने ( - ) श ( . ) तः ( - ) पितृ ( . . ) सुखं ( . - ) जीवा ( - - ) त्म ( - ) ज ( . ) स्था ( - ) न ( . ) तः ( - ) 19 syllables! Perfectly शार्दूलविक्रीडित!