जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४५२ सटीकजातकपारिजाते- नववें स्थानमें शुभग्रह गुरुके वर्गमें हो, नवमेश गुरुके नवांशमें हो तो गुरु भक्तिमें रत तथा सुखी हो । गुरु, शुक्र या बुधके अंशमें नवमेशको शुभग्रह देखते हों वा शुभग्रहोंके बीचमें हो तो वह मनुष्य धर्म करनेवाला होवे ॥ ९४-९५ ॥ धर्मे पापे पापभाक् स्यात् तदीशे पापसंयुते । क्रूरषष्ट्यंशके वाऽपि धर्महीनो भवेन्नरः ॥ ९६ ॥ धर्मे पाप इति । कस्मिंश्चित पापग्रहे धर्मे = नवमभावे गतवति जातो नरः पापभाक् = पापी भवति । तदीशे = नवमभावेशे पापसंयुते = केनापि पापेन सहिते, अपि वा क्रूरषष्ट्यं- शके गतवति सति नरो धर्महीनः = पापकर्मा भवेदिति ॥ ९६ ॥ नववेंमें पापग्रह हो तो पापी हो । धर्मेश पापग्रहसे युक्त हो वा क्रूर षष्ट्यंशमें हो तो धर्मसे हीन हो ॥ ९६ ॥ बलवति शुभनाथे केन्द्रकोणोपयाते शुभशतमु