जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४८६ सटीकजातकपारिजाते- हो तो सम्पूर्ण कला संगीत और वाद्यकी प्रिया हो । शुक्रका अंश हो तो पण्डितकी स्त्री, सुन्दरी और लोकमें आदरणीया हो ॥ १३ ॥ बुध का गृह ( ३।६ ) लग्नमें हो तो मङ्गलके त्रिंशांशमें पुत्रसे युक्ता हो । शनिका अंश हो तो विधवा वा मृतवत्सा हो । नपुंसकके समान और पापिनी हो । गुरुके अंशमें हो तो स्वामीमें तत्पर रहे । बुधके त्रिंशांशकी स्त्री विख्यात तेजवाली हो । शुक्रके त्रिंशांशकी सुन्दर वस्त्र-भूषण-शोधनसे प्रसिद्धा हो ॥ १४ ॥ लग्न चन्द्रमाके गृह ( कर्क ) में हो तो मङ्गलके त्रिंशांशमें स्त्री बली हो । चन्द्रमा पाप- ग्रहसे देखा जाता हो उस समय उत्पन्न कन्या जार पुरुषसे विनोद करनेवाली हो । शनिके त्रिंशांशमें विध्वस्ता, बृहस्पतिके त्रिंशांशमें अल्प आयुवाली तथा अल्प पुत्रवाली होती है । बुधके त्रिंशांशमें शिल्पकला जाननेवाली, शुक्रके त्रिंशांशमें विशेष कामिनी होती है ॥१५॥ सूर्यके गृह ( सिंह ) में लग्न वा चन्द्रमा हो उसमें मङ्गलका त्रिंशांश हो तो स्त्री पुरुषके समान प्रकृतिवाली और कुलटा हो । शनिके त्रिंशांशमें हो तो दुःखिनी हो । गुरुके त्रिंशांशमें हो तो राजाकी स्त्री, गुणवती हो । बुधके त्रिंशांशमें हो तो पुरुषकी इच्छा करनेवाली हो । शुक्र त्रिंशांशका हो तो दुष्टा, जारके प्रेममें तत्पर तथा रोगिणी हो ॥ १६ ॥ बृहस्पतिका गृह ( धनु या मीन ) लग्न हो मङ्गलके त्रिंशांशमें उत्पन्न हो तो भाग्य- वती, विख्यात तथा परिवार युक्ता हो । शनिके अंशमें दरिद्रा हो । बृहस्पतिके अंशमें हो तो धन-वस्त्र-भूषणवाली हो । बुधके अंशमें हो तो सुपूजिता हो । शुक्रके अंशमें साध्वी पुत्रवती और सुवस्त्र भूषणसे युक्ता हो ॥ १७ ॥ लग्न शनिका गृह ( मकर या कुम्भ ) हो, उसमें बलवान् मंगलका त्रिंशांश हो तो शोक युक्ता हो। शनिका अंश हो तो दुर्भगा हो। बृहस्पतिका अंश हो तो निज कुलाचारमें अनुरक्ता हो। बुधके अंशमें उत्पन्न हो तो सर्वज्ञा और कुलटा वह स्त्री हो। शुक्रके अंशमें बन्ध्या और पतिव्रता हो। स्पष्ट लग्न और चन्द्रमाके योगसे स्त्री समस्त त्रिंशांश जनित फल कहा है॥१८॥ स्त्रीजातके लग्नत्रिंशांशफलचक्रम् ।
| लग्नराशयः च-न्द्रराशयो वा | भौमत्रिंशां-शफलम् | शनित्रिंशांश फलम् | गुरुत्रिं-फलम् | बुधत्रिं-फलम् | शुक्रत्रिं-फलम् |
|---|---|---|---|---|---|
| भौमगृहे १।८ मे. वृश्चिक. | दुराचारिणी | प्रेष्या | गुणवती, साध्वी | मलिना | जारिणी |
| शुक्रगृहे २।७ वृ. तु. | कलहकृत, दुष्टा | पुनर्भूः | साध्वी, पुत्रिणी | कलावती | सुभगा, लोक-प्रिया, पण्डिता |
| बुधगृहे ३।६ मि. कन्या. | पुत्रान्विता | विधवा अपु-त्रा वा | भर्तृपरा | तेजस्विनी | मनोरमा |
| चन्द्रगृहे ४ कर्क | बलवती जा-रिणी | विध्वस्ता | अल्पायुरल्पा-त्मजा | शिल्पकलावती | कामुकी |
| सूर्यक्षेत्रे ५ सिंहे | पुम्प्रकृतिः, कुलटा | दुःखिता, | नृपवल्लभा | पुंचेष्टिता | दुष्टा, रोगिणी |
| गुरुगृहे ९।१२ ध. मी. | विख्याता, सपुत्रा. | दरिद्रा | धनवस्त्रभूषण-वती | सम्पूजिता | साध्वी, पुत्रवती |
| शनिगृहे १०।११ म. कु. | शोकिनी | दुर्भगा | कुलीना | सर्वज्ञा, कुलटा | बन्ध्या, सती |