जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)

जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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३२ सटीकजातकपारिजाते- रात्रौ कालादिज्ञानचक्रम्
| रात्रि | १ खं. | २ खं. | ३ खं. | ४ खं. | ५ खं. | ६ खं. | ७ खं. | ८ खं. |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र. | य. घं. | कोदं. | गु. | का. | प. | धू. | अ. या. | निरीश |
| चं. | कोदं. | गु. | का. | प. | धू. | अ. या. | य. घं. | ,, |
| मं. | गु. | का. | प. | धू. | अ. या. | य. घं. | कोदं. | ,, |
| बु. | का. | प. | धू. | अ. या. | य. घं. | कोदं. | गु. | ,, |
| बृ. | प. | धू. | अ. या. | य. घं. | कें दं. | गु. | का. | ,, |
| शु. | धू. | अ. या. | य. घं. | कोद. | गु. | का. | प. | ,, |
| श. | अ. या. | य. घं. | कोदं. | गु. | का. | प. | धू. | ,, |
| अथ रव्यादीनां स्वरूपम् । | ||||||||
| भानुः श्यामललोहितद्युतितनुश्चन्द्रः सिताङ्गो युवा, | ||||||||
| दूर्वाश्यामलकान्तिरिन्दुतनयः, संरक्तगौरः कुजः ॥ | ||||||||
| मन्त्री गौरकलेवरः, सिततनुः शुक्रोऽसिताङ्ग शनिः, | ||||||||
| आनीलाकृतिदेहवानहिपतिः, केतुर्विचित्रद्युतिः ॥ ७ ॥ | ||||||||
| अथेदानीं सूर्यादीनां शरीरवर्णा उच्यन्ते । भानुः=सूर्यः श्यामललोहितद्युतितनुः = | ||||||||
| श्यामरक्तमिश्रितकान्तिशरीरः = जपाकुसुमवर्णः । चन्द्रः सिताङ्गः = श्वेतवर्णो यथा दुग्धम् , | ||||||||
| युवा = यौवनावस्थश्च । इन्दुतनयः = बुधः, दूर्वाश्यामलकान्तिः = दूर्वासदृशश्यामवर्णः । | ||||||||
| कुजः मङ्गलः संरक्तगौरः=रक्तगौरमिश्रवर्णो यथा प्रवालः । मन्त्री=बृहस्पतिः, गौरकलेवरः= | ||||||||
| गौरशरीरः । शुक्रः सिततनुः = श्वेतशरीरः । शनिरसिताङ्गः = कृष्णवर्णः । अहिपतिः = | ||||||||
| राहुः, आनीलाकृतिदेहवान् = अतिनीलवर्णः । केतुर्विचित्रद्युतिः = अनेकवर्णमिश्रितशरीर इति । | ||||||||
| प्रयोजनञ्च - जन्मनि जातकस्य तथा प्रश्ने प्रष्टुरभीष्टवस्तुनश्च तत्काले बलीयान् ग्रह आ- | ||||||||
| त्मवर्णमिव वर्णं करोति ॥ ७ ॥ | ||||||||
| सूर्य-श्याम और लाल मिश्रित वर्ण है। चन्द्रमा-सफेद रंगका युवा है। बुध-दूर्वाके | ||||||||
| सदृश हरितवर्ण है। लाल और सफेद मिला हुआ वर्ण मंगलका है। बृहस्पति गौर शरीर- | ||||||||
| वाला है। शुक्रका सफेद शरीर है। शनिका कृष्ण शरीर है। नीले रङ्गकी देहवाला राहु और | ||||||||
| विचित्रवर्ण केतु है ॥ ७ ॥ | ||||||||
| अथ ग्रहाणां शुभाशुभत्वादिनिरूपणम् । | ||||||||
| प्रकाशकौ शीतकरप्रभाकरौ, ताराग्रहाः पञ्च धरासुतादयः ॥ | ||||||||
| तमः स्वरूपौ शिखिसिंहिकासुतौ, शुभाः शशिज्ञामरवन्द्यभार्गवाः ॥ ८ ॥ | ||||||||
| क्षीणेन्दु मन्दरविराहुशिखिक्षमाजाः पापास्तु पापयुतचन्द्रसुतश्च पापः ॥ | ||||||||
| तेषामतीव शुभदौ गुरुदानवेज्यौ, क्रूरौ दिवाकरसुतक्षितिजौ भवेताम् ॥ ६ ॥ | ||||||||
| शुक्लादिरात्रित्रिदशकेऽहनि मध्यवीर्यशाली, द्वितीयदशकेऽतिशुभप्रदोऽसौ । | ||||||||
| चन्द्रस्तृतीयदशके बलवर्जितस्तु सौम्येक्षणादिसहितो यदि शोभनः स्यात् ॥१०॥ |