जातक पारिजात (वैद्यनाथ दीक्षित - शास्त्रीय होरा फलित, राजयोग एवं आयुर्दाय सटीक)
Jataka Parijata of Vaidyanatha Dikshita with Commentary
वैद्यनाथ दीक्षित (टीकाकार: पं. कपिलेश्वर शास्त्री एवं पं. मातृप्रसाद शास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगोगभयशो- Wait, "सर्वे नरा गोगभयशो-" or "सर्वे नराः"? In L11: "सर्वे नरा" (no visarga, or faint? Looks like "सर्वे नरा"). L12: कविमुक्तचित्ताः = रोगाणां भयजनितो यः शोकस्तस्माद्विमुक्तं चित्तमन्तःकरणं येषां ते तथा L13: सन्तः सुखयशोबलशालिनः स्युः । अरिष्टग्रहं विधिना सम्पूज्य विमुक्तरोगः शीघ्रमेव L14: सुखमेधन्त इत्यर्थः ॥८३॥ L15: जिस धातुके कोपसे रोग होते हैं, उसकी शान्तिके निमित्त उसके स्वामीके प्रसन्नार्थ L16: शीघ्र जप-तर्पण-होम-दानोंसे अच्छी तरह पूजाकर सब मनुष्य रोग, शोक, भय और L17: चिन्तासे रहित होकर सुख, यश और बलसे युक्त होते हैं । (सु० शा० कार ) ॥ ८३ ॥ L18: अथ ग्रहाणां बाल्याद्यवस्थानिरूपणम् । L19: बालः कुमारोऽथ युवा च वृद्धो मृतश्च राशावयुजि क्रमेण । L20: त्रिंशांशकैर्व्यत्ययतः समे स्युरेकैकशोंऽ