भारतकोश
काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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( २५ ) चतुर्विंशे युगे चापि विश्वामित्रपुरःसरः । राज्ञो दशरथस्याथ पुत्रः पद्मायतेक्षणः ॥' ( हरिवंश १।४१।१२१ ) ‘चतुर्विंशे युगे वत्स त्रेतायां रघुवंशजः । रामो नाम भविष्यामि चतुर्व्यूहः सनातनः ॥’ ( ब्रह्माण्ड पुराण उपोद्घातपाद अ० ३७ श्लो० ३० ) वैवस्वत मनु को हुए अब तक बारह करोड़ पांच लाख तैंतीस हजार वर्ष से भी अधिक हुए। वर्तमान सृष्टि को हुए अब तक १ अरब ९५ करोड़ ५८ लाख २५ हजार से अधिक हुआ। ब्रह्मा के एक दिन में १४ मनु बीतते हैं जिसमें ४ अरब ३२ करोड़ वर्ष होते हैं। १५ खरब, ५५ अरब २० करोड़ मानव वर्ष का उनका एक वर्ष होता है। अब तक ब्रह्मा के ५० वर्ष बीत गये हैं। जिसमें ७ नील ७७ खरब, ६० अरब वर्ष बीत गये हैं। इस महान् काल में रामायण, महाभारत तथा पुराणों में वर्णित पीढ़ियां बहुत ही कम ठहरती हैं। अतः व्यासदेव ने उनमें से मुख्य-मुख्य राजाओं का वर्णन किया है। उसी वंश में होने वाले पूर्व-पूर्व मुख्य पुरुषों के पुत्रादि रूप में उत्तरोत्तर मुख्य पुरुषों का वर्णन किया है। लिंग पुराण में कहा है—‘एते ह्येते इक्ष्वाकुदायादा राजानः प्रायशः स्मृताः । वंशे प्रधानां एतस्मिन् प्राधान्येन प्रकीर्तिताः ॥’ ( लिङ्ग पुराण पूर्वार्ध ६६।३३ ) पुरातत्त्व रामायण-महाभारत पुरातत्त्व के आधार पर भी काल निर्धारण आंशिक रूप से ही हो सकते हैं जिसे भूरे चित्रित पात्र स्तर की उपलब्ध सामग्रियों से महाभारत कालीन सभ्यता से सम्बन्धित किया गया है, उनसे महाभारत की विकसित सभ्यता से मेल नहीं खाता। महाभारत में वर्णित अस्त्र-शस्त्र पूर्ण विकसित सुसज्जित प्रणाली के द्योतक हैं। उत्खनन में प्राप्तसामग्रियां महाभारत में वर्णित सामग्रियों से मेल नहीं खातीं। अतएव वे सब महाभारत कालीन नहीं है। कुछ लोगों का मत है कि महाभारत में वर्णित लोह अस्त्र-शस्त्र का आवि- र्भाव ईसाके कुछ शताब्दी पूर्व हुआ तो महाभारत की घटना ईसा से हजारों