काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)
Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २४ ) कुछ शिक्षा मिलती हो उन्हों घटनाओं और व्यक्तियों का इतिहास में उल्लेख होता है । अन्यथा जिनका ऐतिहासिक एवं प्रागैतिहासिक काल ६ हजार वर्ष में ही समाप्त हो जाता है उनके अनुसार भी यदि संसार के एक वर्ष के इतिहास को एक पन्ने में ही लिखा जाय तो भी ६ हजार पन्ने का इतिहास . होगा । फिर जिन भारतीयों की वर्तमान सृष्टि का कुछ कम दो अरब वर्ष का इतिहास है। उनका इतिहास दो अरब पन्नों का होगा फिर उसे कौन कितने दिन में अध्ययन करेगा और उतने बड़े इतिहास का निष्कर्ष कितने दिन में अध्ययन करेगा और उतने बड़े इतिहास का निष्कर्ष कितने दिन में निकालकर कब उससे सबक सीखकर उससे फायदा उठायेगा । अतः सर्वज्ञकल्प महर्षियों ने टेलीप्रिंटर के समाचारों, संवाददाताओं के तारों के आधार पर नहीं, आँखों देखे के आधार पर भी नहीं, किन्तु योगजन्य ऋतम्भरा प्रज्ञा के आधार पर समाज एवं राष्ट्र के धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक उत्थान के उपयोगी ज्ञानप्रद इतिहास का उल्लेख किया है । अन्यथा गड़े मुर्दों को बार-बार उखाड़ने जैसी पुरानी बातों को बार-बार दोहराना मात्र इतिहास का मुख्य विषय हो ही नहीं सकता है । अतएव सर्वज्ञकल्प महर्षियों ने अनादि, अपौरुषेय वेदादि शास्त्रों से अनुप्राणित राम और युधिष्ठिर जैसे विशिष्ट अवतारी पुरुषों एवं उनसे सम्बन्धित व्यक्तियों एवं घटनाओं का. प्रामाणिक उल्लेख किया है । रामायण महाभारत तथा पुराणों के राजाओं की सूची में भी मुख्य-मुख्य उल्लेख्य राजाओं का उल्लेख हुआ है, सबका नहीं । उनमें भी कुछ लोगों की आयु बहुत अधिक थी । रामायण के अनुसार श्री रामचन्द्र जी ने ११०००, वर्ष तक राज्य किया । दशरथ जी का उससे भी अधिक काल तक राज्य करने का ,उल्लेख है । उनमें कई राजा कृतयुग के, कई त्रेता के थे । युधिष्ठिर द्वापरान्त के राजा थे । मानवीय वर्ष के अनुसार कलि की आयु ४३२००० की है । उससे दुगुनी द्वापर, तिगुनी त्रेता तथा चौगुनी कृत युग की आयु है । चौदह मन्वन्तरों में वर्तमान वैवस्वत मन्वन्तर का यह अठाइसवाँ कलियुग है । श्रीराम का प्रादुर्भाव २४ वें त्रेता का है ।