भारतकोश
काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

DevanagariHindipublished115 पृष्ठ

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( २२ ) 'ददौ तस्य ततः प्रीतः स्वनामाङ्कोशोभितम् । अंगुलीयमभिज्ञानं राजपुत्र्याः परन्तपः ॥ १२ ॥' ( किष्किन्धा० ४४ ) हनुमान् जी ने जगज्जननी सीता से कहा कि 'हे देवि ! मैं रामदूत बानर हूँ। देखो राम नाम से अंकित यह अंगूठी मैं लाया हूँ ।'' 'वानरोऽहं महाभागे दूतो रामस्य धीमतः । रामनामाङ्कितं चेदं पश्य देव्यंगुलीयकम् ॥ २ ॥' ( सुन्दर० ३६ ) भरत जी को भी हनुमान् जी ने सुनाया कि मैंने रामनाम वाली अँगूठी सीता के अभिज्ञान के लिये दी है । अभिज्ञानं मया दत्तं रामनामांगुलीयकम् ॥ ४५ ॥' ( युद्ध काण्ड १२६ ) इसी तरह भगवान् राम के नामों वाले बाणों की चर्चा भी रामायण में है। इसी प्रकार सीता रावण के वश में कैसे हो इसका विचार करते हुए महोदर ने रावण से कहा कि आप सीता को प्राप्त करके उसके भोग में क्यों विलम्ब कर रहे हैं ? आप जब चाहें तब सीता वश में हो सकती है। मैंने कुछ उपाय सोचा है यदि आप को जँचे तो उसके अनुसार आप कार्य करें । हम द्विजिह्व संह्लादी कुम्भकर्ण और वितर्दन ये पाँच महावीर राम का वध करने जा रहे हैं, इसकी घोषणा करा दीजिये । हम लोग युद्ध में जाकर यदि शत्रु विजय कर लेते हैं तो दूसरे उपाय की आवश्यकता नहीं । यदि शत्रु मरा नहीं और हम लोग युद्ध में बचे रहे तो युद्ध से वापस आ जायेंगे । हम लोगों का शरीर रामनामांकित बाणों से क्षत-विक्षत होगा, रुधिर शरीर से निकल रहा होगा । हम लोग मिथ्या ही कहेंगे कि हम लोगों ने राम और लक्ष्मण को खा लिया है और आप के चरणों में प्रणाम करेंगे । आप बनावटी प्रसन्नता दिखाते हुये हम लोगों की इच्छा के अनुसार इनाम दें। ऐकान्त में सीता के