भारतकोश
काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

काल मीमांसा (स्वामी करपात्री जी महाराज - काल-तत्त्व, मुहूर्त एवं युगाब्द दार्शनिक मीमांसा)

Kaal Mimansa of Dharma Samrat Swami Karpatri Maharaj

धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा

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( ३२ ) पास जाकर आप उसे अनेक प्रकार की सान्त्वना दें। धनधान्य रत्नों का लोभ दें तब सीता आप के वश में हो जायगी। 'लब्ध्वा पुरस्ताद् वैदेहीं किमर्थं त्वं विलम्बसे । यदीच्छसि तदा सीता वशगा ते भविष्यति ॥ २० ॥ दृष्टः कश्चिदुपायो मे सीतोपस्थानकारकः । रुचितश्चेत्तवया बुद्ध्वा राक्षसेन्द्र ततः शृणु ॥ २१ ॥ अहं द्विजिह्वः संह्लादी कुम्भकर्णो वितर्दनः । पञ्च रामवधायैते निर्यान्तीत्यवघोषय ॥ २२ ॥ ततो गत्वा वयं युद्धं दास्यामस्तस्य यत्नतः । जेष्यामो यदि ते शत्रून् नोपायैः कार्यमस्ति नः ॥ २३ ॥ अथ जीवति नः शत्रुर्वयं च कृतसंयुगाः । ततः समभिपत्स्यामो मनसा यत्समीक्षितम् ॥ २४ ॥ वयं युद्धादिहेष्यामो रुधिरेण समुक्षिताः । विदार्यंस्वतनूं बाणै रामनामाङ्कितैः शरैः ॥ २५ ॥ भक्षितो राघवोऽस्माभिर्लक्ष्मणश्चेति वादिनः । ततः पादौ ग्रहीष्यामः त्वं नः कामं प्रपूरय ॥ २५ ॥ भक्षितः समुहृद्रामो राक्षसैरिति विश्रुते । अकामा त्वद्वशं सीता नष्टनाथा भविष्यति ॥ २६ ॥ (युद्धकाण्ड सर्ग ६८) इसी प्रकार डाक्टर साकलिया एवं उनके जैसे कुछ नवीन पुरातत्त्वविदों ने रामायण की कतिपय घटनाओं तथा विशिष्ट स्थानों की प्रामाणिकता तथा उनके सम्बन्ध में नये सूत्र के अन्वेषण के बाद विवाद उठाया है। डाक्टर साकलिया ने वाल्मीकीय रामायण को पूर्ण प्रामाणिक ग्रन्थ माना है। वे उसे महाकाव्य मानते हैं। परन्तु उसमें वर्णित सेतुबन्ध, हनुमान द्वारा समुद्र पार गमन, अँगूठी प्रसंग, लंका की स्थिति तथा कुछ ऐसी ही घटनाओं को उन्होंने अप्रमाणिक तथा काल्पनिक माना है। इस सम्बन्ध में उनके तर्क अत्यन्त आधारहीन तथा परस्पर विरोधी ज्ञात होते हैं।