कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 100, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंइस कारण वेदका ज्ञान तथा प्रकाश उन ऋषियोंमें पहलेसे होता है। अग्नि देवता स्वयं निरञ्जनजी हैं। आदित्य नाम सूर्यका है, उस सूर्यको भी वेदका ज्ञान होता है, उसके मध्य प्रकाश होता है, सुतरां गीतामें कृष्णने अर्जुनसे कहा है कि, अर्जुन ! जिस ज्ञानको आज तुझसे मैंने कहा है, उसको पूर्वमें मैंने सूर्यसे कहा था। तब अर्जुनने कहा कि, हे महाराज ! आप तो अब उत्पन्न हुए हैं और सूर्य तो पुराना देवता है। तब कृष्णने कहा कि हे अर्जुन ! मेरे और तेरे जन्म अनन्तबार हुए हैं, तू अपने पूर्वजन्मोंके वृत्तान्तको नहीं जानता, मैं जानता हूँ, इस प्रकार प्रमाणित होता है कि, ब्रह्मासे पूर्व सूर्य था। अग्नि देवता स्वयम् निरंजन हैं और जो निरंजन हैं वही कृष्ण हैं, निरंजन तथा कृष्णमें तनिक भी विभिन्नता नहीं है सो वास्तवमें कृष्णने पहले सूर्यसे कहा था। वेद तथा गीतामें कुछभी विभिन्नता नहीं, इस कारण ये ऋषि मनुष्योंकी उत्पत्तिसे पहले ठहरे और ब्रह्मा पीछे उत्पन्न हुआ, इसी कारण कहा जाता है कि, ब्रह्माने आदित्य और अग्निसे ज्ञान सीखा। अग्नि तथा सूर्य दोनों एकही रूप हैं—परन्तु ये ऋषि-गणभी वेद प्रचारक ठहर नहीं सकते, कारण यह कि, जगत् ब्रह्माके संकल्पसे हुआ है।।
कबीरसाहबने ग्रंथ अनुरागसागरमें प्रगट कहा है—देखो गायत्री तथा अच्छाके वात्सलापमें—हे गायत्री ! तू ब्रह्माको ले आ। कारण यह कि, बिना ब्रह्माके इस जगत्की रचना नहीं हो सकती ? इस कारण इस जगत्को ब्रह्माने बनाया। ब्रह्मा द्वारा मनुष्योंको वेद मिले। सब ऋषि मुनि तथा राजा प्रजा ब्रह्मा द्वारा वेद पाते हैं और उसीकी आज्ञाओं पर चलते हैं।
वेदोपनिषद् प्रजापतिके उत्पत्तिपर्वमें देखो—लिखा है कि, सबसे पहले प्रजापति उत्पन्न हुए तब सूर्यको देखा और उसको खानेके लिये हाथ पसारा। जब प्रजापतिने सूर्यको पकड़कर खानाना चाहा, तब सूर्यने भयभीत होकर अपने मुंहसे “यहाँ” का शब्द किया। तब प्रजापतिने सूर्यको भोजनकी वस्तु न समझ कर नहीं खाया छोड दिया और अन्य प्रकारकी सहस्रों वस्तुएँ अपने भोजन योग्य बनायी।
फिर योगवासिष्ठमें लिखा है कि, पहाडपर बसिष्ठ नामक एक ब्राह्मण था, उसके दश बेटे थे। इन दशों पुत्रोंने बड़ी तपस्या की और उन्होंने अपनी उस तपस्याका वर यह माँगा कि, हम दशों भाई ब्रह्मा हो जावें और वे सब ब्रह्मा हो गये। इन दशों ब्रह्माके निमित्त, दश ब्रह्माण्ड प्रकट हुवा उन्हीं दश ब्रह्माण्डोंमें यह एक ब्रह्माण्ड हमारा है। जब हमारे ब्रह्माण्डका ब्रह्मा प्रकट हुआ, तब जगत्को