भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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देखकर आश्चर्यान्वित हुआ और अपने मनमें सोचने लगा कि, इस सृष्टिका कर्ता कौन है ? यह बात किससे पूछूं ? तब सूर्यको सामने देखकर उसने पूछा कि, हे सूर्य ! तू मुझको बतला कि, इस सृष्टिका उत्पन्नकर्ता कौन है ? तब सूर्यने उत्तर दिया कि, हे ब्रह्मा ! मुझको अत्यंत आश्चर्य है कि, तू अपने कार्योंसे स्वयम् अनभिज्ञ है पर तूने जो पूछा सो मैं तुझसे कहता हूँ । तब सूर्यने ब्रह्माको पूर्वजन्मकी सब कहानी कह सुनायी और कहा कि, हे ब्रह्मा ! यह जगत् तेरेही संकल्पसे बना है और इसका कर्ता तूही है । यह ब्रह्माण्ड तेरा है । ऐसी ही अपनी अज्ञानावस्थामें ब्रह्माने सूर्य तथा अग्नि देवतासे विद्याध्ययन किया । इससे प्रमाणित है कि, ब्रह्मासे पूर्व अग्नि और आदित्य इत्यादि थे, इसी कारण ब्रह्माने अग्नि और सूर्य इत्यादिसे ज्ञान लाभ किया और विद्या सीखी ।

छब्बीसवाँ प्रकरण

ब्रह्मासे ऋषिमुनियोंकी श्रेष्ठता ।

ब्रह्मा तो सांसारिक मनुष्य है इस कारण उसकी आयुकी सीमा है, समय पाकर मर जाता है और फिर जन्म पाता है । पर ऋषिमुनिकी आयु तथा उनके अधिकार प्रभुत्व अनन्त हैं । वे ऋषि मुनि जो हंस कबीर कहलाते हैं उनका जन्म मरण तो कभी होताही नहीं, वे आवागमनसे रहितही हैं, पर वे ऋषि जो योग समाधि साधन प्राणायाम इत्यादि करते हैं वेभी योग तथा कायाकल्प इत्यादिके प्रभावसे, मार्कण्डेय, गुप्तमुनि तथा धनुषमुनि इत्यादिके समान अनेक युगों पर्यन्त जीवित रहते हैं, जब मृत्यु आती है तब प्राणायाम द्वारा बचते हैं और जब वृद्ध हो जातेहैं तब कायाकल्प द्वारा, फिर युवक हो जाते हैं, इस प्रकार ब्रह्माकी आयुसे ऋषियोंकी आयु विशेष है, वे महाप्रलयसे बच सकते हैं, इस प्रकार ऋषियोंकी आयु तथा विद्या ब्रह्मासे बढ़कर है । जैसे अग्नि देवता अथवा अग्नि ऋषि अथवा आदित्य ऋषि वायु देवता अथवा वायु ऋषि और अङ्गिरा ऋषि इत्यादि बड़े विद्वान् तथा सामर्थ्यी हैं ।

यह जगत् अनेकबार उत्पन्न हुआ और मिटजावेगा और अनगिनती ब्रह्मा विष्णु महेशादि हुए और अभी होंगे तथा इस समयभी वर्त्तमानहैं, भिन्न २ ब्रह्माण्डोंमें राज्य कर रहे हैं और प्रभुत्व भोग रहे हैं । इस रचनाकी कोई सीमा तथा अवधि नहीं है, अनगिनती ढंगपर रचना हुई और होती है, उन्हीं अनगिनती ब्रह्माण्डोंमेंसे एक ब्रह्माण्ड हमारा है, जिसके प्रबंधकर्त्ता तथा शासक