भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 102

ब्रह्मा, विष्णु, महेश ठहराये गये और इन चारों वेदोंके कर्ता धर्ता येही नियुक्त हुए संसारी जीवोंके निमित्त तो यही चारों परमसंवेद है और जो इन ज्ज्जालोंसे छूटा चाहें और मुक्ति पाना चाहें, उनके निमित्त स्वसंवेद है ।

ये दोनों वेद उसी साहबके हैं, जबतक जीव सांसारिक कामनाओंमें बद्ध है और उसीमें सुखी और प्रसन्न है, तबतक परसम्वेदके अधीन रहे और जब इन ज्ज्जालोंसे उसका मन उचट जावे तब, स्वसम्वेदकी शिक्षाओंका अनुसरण करे । छोटा बच्चा जबतक अनजान रहता है तबतक उसके माता पिता उसको धूल मिट्टी और खेल कूदमें संलग्न रहनेसे वर्जित नहीं करते । पर जब बच्चा समझदार होता है, तब उसको मना करते हैं कि, अब खेल कौतुकका समय नहीं है, अब बुद्धि ठिकाने करके विद्योपार्जन करो और अपनी जड़को समझो और मुक्ति प्राप्त करो ।

सत्ताईसवाँ प्रकरण

वेद और किताबोंके मूलका वर्णन ।

जैसे वेदके माननेवाले इस बातका दावा करते हैं कि, वेद ईश्वरकी वाणी है—वैसे ही मुसलमानोंकाभी कथन है कि, उनका कुरान खुदाका कलाम है (बचन है) ऐसे ही यहूदी तौरीतको अल्लाहकी वाणी समझते हैं, सबोंके पास तो परमेश्वरकी वाणी आयी और उसको पढ पढकर सभी आनन्दित हो रहे हैं । पर यह बडे आश्चर्यकी बात है कि, परमेश्वरको न किसीने जाना और न पहचाना, उन्हें जरा भी खबर नहीं हुई कि, वह कहाँ रहता है तथा क्या वस्तु है ? देखो स्वयम् कुरानही कहती है कि, मैं चुनी गयी, एक बडे कुरानसे । यह बात स्पष्ट प्रमाणित है कि, कुरान नकल की गयी है, एक बडी साफ और शानवाली कुरानसे । किन्तु मुसलमानोंको इस बातकी तनिक भी सुध नहीं है कि वह शानवाला कुरान कहाँ है और वह कुरान किसी दूसरी जातीके पास है अथवा नहीं ? बहुतेरे मुसलमानोंका कहना है कि, वह बडा कुरान किसी लौहमहफूज पर है । जब इतनी सुधभी मुसलमानोंको नहीं है कि, यह कुरान किस शानवाले कुरानकी नकल है तो फिर कुरानके परमेश्वरकी वाणी होनेका क्या प्रमाण है, न उसपर खुदाकी मुहर है और न उसपर उसका हस्ताक्षर है । जब न परमेश्वरके वाक्यको पहचाना और न खुदाको जाना, फिर बंधन तथा मुक्ति कैसे हो सकती है ? और नर्क बैकुण्ठ और दुःख सुखका क्या परिणाम है ?