भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1042

इंजीलके मुख्य धर्म

१—आदिमें शब्द था, वह ईश्वरके साथ था, वह शब्द ईश्वर था। २—यही आदिमें ईश्वरके साथ था। ३—सब पदार्थ इसीसे प्रगट हुये, पहले कोई ऐसा पदार्थ नहीं था जो इसके बिना हुआ हो। ४—जीवन उसमें था वह जीवन मनुष्यका प्रकाश था। ५—प्रकाश अन्धकारमें चमकता है अन्धकारने उसे नहीं पहचाना।

आदिमें शब्द था और शब्द ईश्वर था।

कबीर वचन।

नाम कहूँ तो नाम न ताका। नाम राया काल है जाका ॥
है अनाम अक्षरके माहीं। निः अक्षरको जानत नाहीं ॥
शब्द कहो तो शब्दौं नाहीं। शब्द भया मायाके माहीं ॥
दो बिन हो न अधर अवाजा। किये कहा सो काज अकाजा ॥

(भवतारण)

अवघातजन्य — कोई भी शब्द दोके बिना नहीं हो सकता, यह बात पहले भी लिख आया हूँ। जितने वाणी आदि शब्द हैं वे द्वैत बिना प्रगट नहीं होते, जहाँ दो हैं वहाँ माया है। जो शुद्ध निरवयव निराकार चैतन्य ब्रह्म है, वह सर्व प्रकारकी अशुद्धतासे, रहित है। जो भेदसे रहित है वही शुद्ध है। वहाँ पूर्वोक्त शब्द वाणी कुछ भी नहीं, जहाँ किसी प्रकारका भेद न हो वहाँसे वैसे शब्द कदापि प्रगट नहीं होते। कहना सुनना मायामें है, ब्रह्ममें नहीं, संसारकी उत्पत्ति नाश करनेवाली माया है। माया कोही सब ब्रह्म करके पूजते हैं, वह शुद्ध ब्रह्म कैसे हो सकता है? मायाही प्रगट हो रही है सब उसीमें लग रहे हैं।

खुदाको न देखा—देखो योहन्नाकी किताबका —१ बाब १८ आयत, स्पष्ट प्रगट करता है कि, किसीने खुदाको कभी न देखा। अतः नवियोंका खुदाका दर्शन पाना झूठा ठहरा। जो रूप पैगम्बरोंने देखा वह खुदा न था। यह आयत स्पष्ट प्रगट कहती है कि, किसी पैगम्बरने खुदाको नहीं देखा। १८ वे आयतका जो शेष है उसके ऊपर विचार करो, वह यह है (इकलौता बेटा जो पिताकी गोदमें है उसने बतला दिया) इकलौते बेटा हजरत ईसा ठहरे, इकलौते बेटेने क्या बतला दिया? इकलौते बेटेने केवल इतनाही कहाकि, जिसने मुझको देखा उसने मेरे बापको देखा, मुझमें मेरे पितामें कुछ भी भेद नहीं है। इकलौते बेटेने इसकी स्पष्ट व्याख्या कहाँ की है कि, खुदा किस रङ्ग ढङ्गका है। समस्त इंजील देख लो। ईसाइयोंमें ईसाकी आज्ञानुसार जिसने उनको देखा होगा, वे कौन २ महाशय