भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1051

शिरपर जो अक्षर (मुक्तआत और मुफर्दात) वही उसका शिर और सार है जो कुरानके सिरपर है वही खुदाका स्थान है । उन्हीं सिरोंमें महत्व भेद है । अतः सब शिरके अक्षर (मुक्तआत और मुफर्दात) ईश्वरके भेदके घर हैं । मैंने देख लिया कि, सब इमाम और मुहम्मदी उल्मा (विद्वान्) टीकाकारोंने ऊपरके अक्षरोंको छोड़कर केवल नीचेकेही सूत्रोंकी टीकाएँ की हैं ।

सबोंने कुरानका शिर छोड़ दिया पर धड़की टीका करनेमें बड़ा प्रयत्न उठाया है, इसके लिये अपना असीम बुद्धिबल खर्च किया है । जो शिरको छोड़ देहकोही सबसे बड़ा जानकर लगा रहै, तो सुख क्यों कर पा सकता है । शिरका भेद जानना ईश्वरी ज्ञान है, धड़का सांसारिक प्रपञ्च और बन्धन है । मुसलमानी सब महात्मा और विद्वान् लोग कुरानके शिरसे बेसुध हैं । कुरानकी देहको पढ़ने पढ़ाने सुनने सुनानेमें खूब लगे रहते हैं । हां, कुरानकी देहके द्वारा नेकी सीखते सिखलाते हैं, यह भी अच्छा है ।

अलिफ लाम और मीम—कुरानकी सूरै बकरके शिरपर पहले जो ये तीन अक्षर अलिफ, लाम, मीम हैं उसकी टीका करनेमें कुरानके सब टीकाकार असमर्थ हैं । सब उल्माओंने बहुत प्रयत्न किया पर एक पहली आयतका भी आशय न मिला । सबी मुसलमान इसका अर्थ न जाननेसे लड़ाई झगड़ा और रक्तपात करते आये । सहस्रों निरपराधोंका खून बहाया, लाखोंके प्राण हनन किये । हां, कोई कोई विरक्त (दुर्वेश) इन अक्षरोंके आशयसे विज्ञ होंगे, संसारी क्या जाने ? यह कुरान अथर्वण वेदसे है । अथर्वण वेदमें ज्ञानकी बहुत बातें हैं । इन अक्षरोंके अर्थको समझनेवालाही विद्वान् हो सकता है ।

प्रश्न—तीसरा—कलमके विषयमें मेरा यह पूछना है ।

لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ مُحَمَّدٌ رَسُولُ اللَّهِ

लाइला अर्थात् है खुदा, इलाह—नहीं खुदा, अरबी और फारसीमें बोलनेका यो महाबिरा है । “नहीं खुदा मगर खुदा” इससे यों समझना चाहिये कि—
नहीं खुदा है खुदा, नहीं खुदा है खुदा । यह तो इसके यथार्थ अर्थ हैं । जिस दशामें कलमामेही भ्रम पड़ा, जो कहता है कि, नहीं और है खुदा । कुछ भी मुतलक खबर न रही तो मुहम्मद रसूल किसका ठहरा ? यह चैतन्यताकी दशा है कि, अचेतताकी । जैसे मुहम्मदका कलमा भ्रम है वैसेही मुक्ति भ्रम है । भ्रम और धोखेके अतिरिक्त दूसरा कुछ नहीं है ।