कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)
Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)
कबीर साहेब द्वारा
स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 1052, कुल 1367 में से
संदर्भ में पढ़ेंमुसलमानी सांसारिक पंडितोंसे प्रश्न ।
अब मैं मुसलमानी सांसारिक पंडितोंकी ओर फिरता हूँ, जिन लोगोंने अरबी, पारसी, मुक्तिक आदिकी हजारों किताबें छान डालीं । विद्या पूर्णताको पहुँचाई । संसारमें तत्वज्ञानी (फिलसोफी) दोनों (बुद्धिमान) और हकीम प्रसिद्ध हुये । बारीक बीनीमें मशहूर हुशियार हैं ।
प्रथम प्रश्न—इन लोगोंसे केवल इतना पूछना है कि, Huruf तेहज्जी- (अरबी वर्णमाला) का प्रथम अक्षर अलिफ है, सो यह अलिफ कहाँसे आया क्या है ? Huruf इल्लतल (स्वर) तीन हैं (अलिफ, बाव, ये, ये तीनों क्या हैं कहाँसे आये ? क्या काम करते हैं कि किस, कामके लिये विशेषता रखते हैं । अलिफमें क्या इल्लतल है, बावमें क्या इल्लतल है तथा ये में क्या है ? ।
द्वितीय प्रश्न—दूसरा यह पूछना कि, जितने अक्षर हैं सब ज़ोर जबर और पेशके संयोगसे काम देते हैं । बिना इनके सब अक्षर बेकार हैं ? सो यह क्या हैं ज़ोर किस लिये ज़ोर है । जबर किस लिये जबर हैं । पेश किस वास्ते पेश है । पेश मुफ़रिद है कि, मुरक्कब । इस पेशमें दो रूप मालूम होते हैं, एक बैजा (अण्डा) और दूसरी मद्द है, मद्द क्या है ? दोनों किस लिये मिले हैं ? वे दोनों अलग हैं तब क्या हैं ? जब मिले हैं तब क्या हैं ? किस लिये मिले हैं ! किस लिये अलग हैं ? जब अलग २ हैं तब क्या गुण नाम रखते हैं ? इनके अतिरिक्त एक ज़ज्म भी है वह क्या है ? वह क्या गुण रखता है ? उसका मूल क्या है ? उसका नक़ल क्या है ? यह क्या है कहाँसे आये ? सब Hurufकी ये रुह हैं, इनके बिना सब मुरदा है ।
तृतीय प्रश्न—तीसरे यह कि, जब अरबी और फारसी लिखते हैं, तब कागजके सिर पर एक रूप बनाते हैं फिर लिखना आरम्भ करते हैं, इस रूपका क्या अर्थ है ? इसका कुछ अर्थ है कि, निरर्थक है ? कोई २ कहते हैं कि, खुदाका नाम है, सो तो मैं भान लेता हूँ पर इतनाही कहना अलम न होगा । जबतक शीशः और नुकताके भिन्न २ स्पष्ट अर्थ प्रगट न किये जायेंगे तब तक सब निरर्थक हैं ।
मेरे प्रश्नोंके समझने सोचनेसे अन्तःकरणमें प्रकाश और शुद्धता होगी । मैंने सब बातें खोल दी हैं पर गुरुमुख बिना समझना कठिन होगा जिनकी बुद्धि शुद्धि और धीर हैं वे समझेंगे वही सत्य पदके अधिकारी होंगे ।
अङ्ग्रेजी विद्वानोंसे प्रश्न ।
अंग्रेजी विद्वानोंकी तरफ फिरता हूँ । उनमेंसे धार्मिक विद्वानोंसे इतनाही