भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

Devanagarihipublished1,367 पृष्ठ

पृष्ठ 1053, कुल 1367 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1053

पूछना है कि, आदिमें कौनसा शब्द था । किस प्रकार संसारमें आया । यदि वह शब्द मसीह था तो मसीहके साथ गया, अगर नहीं गया तो कहाँ है ? किसके पास है ? इज्जजीलमें कुछ खबर है कि, नहीं ? । तसलीससे केवल बाप बेटा और पवित्र आत्माही आशय है कि, और कुछ ? इन तीनोंका जब एकता होती है तो उनका नाम क्या होता है ? वह क्या काम करते हैं ? सब गुण तो शब्दमें है पर मुक्तिकें लिये कौनसा गुण आवश्यक है ? क्या इतनाही आवश्यक है कि, हम मसीह पर विश्वास करें ? सलीब उठावें, सलीब उठाने और ईसा पर विश्वास लानेसे क्या गुण और आधिक्यता आ गई ? कुछ प्रगट चिह्न भी है ? क्या इज्जजीलपर सच्चा ईमान लानेसे सत्यही पहाड़ अपनी जगहसे टल जाता है ? क्या ऐसा कोई कहीं है ?

इस धर्मके हजारों विद्वान् हैं जिन्होंने सहस्रों पुस्तकें छान डाली हैं । अपनेको बुद्धिमान् और भजन करनेवालोंको तुच्छ समझते हैं । अंग्रेजी फारसी संस्कृत, अरबी, तुर्की, लेटिन फ्रांसीसी और इब्रानी आदिक भाषामें योग्यता रखते हैं । जो बात मैंने संस्कृत पण्डितोंसे पूछी है वही बात इनसे भी पूछना चाहता हूँ । अंग्रेजी भाषाकी वर्णमालामें भी दो प्रकारके अक्षर होते हैं प्रथम (VOWEL) ह्वाविल दूसरेका नाम (CONSONANT) कोन्सोनेन्ट, जो ह्वावेलकी सहायता बिना नहीं बोला जा सकता । ह्वाविल पांच हैं. (AEIOU) ये पांचों ह्वाविल क्या अर्थ रखते हैं ? इन पांचोंके बिना सब अक्षर और उच्चारण तुच्छ हैं । ये पांचों ह्वाविल क्या हैं ? प्रत्येक अक्षरका भिन्न २ क्या अर्थ है ? यदि इनका कुछ अर्थ है तो प्रगट करना उचित है क्योंकि इनका अर्थ समझनेसे मनुष्यके अन्तःकरणमें बड़ा प्रकाश होगा । मैंने इन अक्षरोंके अर्थ किसी किताब डिक्सनरीमें नहीं देखे । न बालकपनमें मुझे इतनी सुधि थी कि, अपने शिक्षकसे इसका अर्थ पूछता । मैं भी अपने दूसरे सहपाठियोंके समान वे अर्थकाही पढ़ता रहा । जब युवावस्था पहुँचा कुछ समझ हुई अपनी भूलके ऊपर दृष्टि पड़ी । अंग्रेजी भाषाके बड़े बड़े प्रसिद्ध विद्वान् इस समय वर्तमान हैं वे सब मेरी ही तरह भूलें तो नहीं हैं ? इन अक्षरों के अर्थ उन्होंने कहीं पढ़े हैं इन पांचों अक्षरोंकी कहीं विस्तृत व्याख्या लिखी हुई है ? ।

मनुष्यत्वका अधिकार—मैंने बहुत लोगोंसे पूछा वे अपनी अज्ञानता ही प्रगट करते रहे तब निराश हो रहा । ये ही पांचों अक्षर सबके शिर, सार अथवा रूह हैं । इनके बिना सब मृत हैं ये पांचों सगकी आत्मा ठहरे इनके बिना सब निर्जीव हैं, तो इनके भेदको जानना ही बुद्धिमानो है । इनके आशय को