भारतकोश
कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

कबीर मन्शूर (स्वसंवेदार्थ प्रकाश)

Kabir Manshoor (Svasamvedarth Prakash)

कबीर साहेब द्वारा

स्रोत: कबीर मन्शूर स्वसंवेदार्थ प्रकाश · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

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पृष्ठ 1054, कुल 1367 में से

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पृष्ठ 1054

समझे बिना पुस्तकोंको पढ़ते जाना बुद्धिमानो नहीं है। यथार्थ भेदको न जाना तो सहस्रों पुस्तकोंके पढ़नेसे क्या लाभ हुआ। यदि कोई कहेंकि, इन अक्षरों के कुछ अर्थ और आशय नहीं हैं, यह बात स्वीकार न करूँगा क्योंकि, ये पांचों निरर्थक होंगे तो सम्पूर्ण विद्या विज्ञान हिकमत निरर्थक हो जायगी। जिस किसीने इन पांचों ह्वाविलके अर्थ पढ़ लिये उनके यथार्थ भेदको जान लिया, उसने भविष्यमें विद्वान् होनेकी नेव डाली जिन लोगोंने इन पांचोंके आशयको समझेबिना बहुतसी पुस्तकें पढ़ ली, वे सब तुच्छ और निरर्थक हुआ। इन्हीं पांचों अक्षरके अर्थको समझ लेना ही विद्या की पूर्णता है कुछ पढ़े अथवा न पढ़े। सांसारिक व्यवहारके लिये भले ही और कुछ पढ़े, परमार्थके हेतु तो केवल इन्हीं पांच अक्षरोंके अर्थ जानना उचित है। यदि इन पांचों में से कोई एक अक्षर का अर्थ भी सीख समझ ले तो उसके अन्तःकरणकी शुद्धता होगी। पांचों अक्षर में पहला अक्षर—ए (A) कहलाता है। यदि कोई इस एक अक्षरका अर्थ समझ ले तो मनुष्यत्व प्राप्त करनेका अधिकारी हो जायगा।

उपदेश—लोगोंने इसी लिये सहस्रों पुस्तकें और अनेक भाषाओंमें दक्षता प्राप्त की है? कि, संसारमें उच्चपद और धन माल? प्राप्त करें बड़े ओहदे और दर्जोंपर स्थिर हों। यदि ऐसा नहीं तो जिसको ईश्वरी ज्ञान प्राप्त करने और मनुष्य पद पर स्थित होने का अनुराग होगा वह अवश्य विवेकी, ज्ञानवानों और सच्चे सन्त साधुओंसे प्रेम करेगा उनके सत्सङ्गसे आत्मिक सुख प्राप्त करेगा। ईश्वरी ज्ञान प्राप्त किया हुआ पूरा महात्मा मिल जावे तो इसी एक अक्षर—A— में समस्त विद्या सिखला देगा। फिर किसी किताबके पढ़ने की इच्छा न रह जायगी।

अंग्रेजी वर्णमाला।

मैं थोड़ासा इस—A— का आशय लिखता हूँ—जब आदिमें कुछ न था। तो वह अनाम निराकार, अचञ्चल, बुद्धिसे परे, वाणीसे परे, अद्वैत था। उसने जब द्वैतकी ओर दृष्टि फेरी तो एक रूप प्रगट हुआ जिसका आकार—O— (अण्डाकार) था, इसको अंग्रेजी ज्ञानमें—ओ बोलते हैं, इसीको साङ्कर भी कहते हैं, जिसका अर्थ है, खाली, सुन्न अथवा कुछ नहीं।

इस अंग्रेजी ह्रूप; ओ—का अर्थ कोई नहीं पढ़ता पढ़ता पर इस ओ—का उच्चारण यथार्थमें ( Woe ) ओ होता है और ( Woe ) का अर्थ चिन्ता, शोक और विपत्ति आदिक हैं।

फिर वही—ओ—जब दूसरे ढङ्गसे लिखा जाता है तब उसका रूप ( Owe ) के समान होता है जिसका अर्थ है—ऋणी (कर्जदार)।

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